त्‍योहार की धूम:मकर संक्रांति आज; स्नान दान से शुरू होगा देवताओं का दिन

बाड़मेर8 दिन पहले
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मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी पौष माह शुक्ल पक्ष द्वादशी शुक्रवार को मनाया जाएगा। - Dainik Bhaskar
मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी पौष माह शुक्ल पक्ष द्वादशी शुक्रवार को मनाया जाएगा।

मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी पौष माह शुक्ल पक्ष द्वादशी शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस वर्ष मकर संक्रांति व्याघ्र पर बैठकर आ रही हैं अर्थात वाहन व्याघ्र और उपवाहन अश्व होगा। 14 जनवरी को सूर्य दोपहर 2.28 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रांति का पर्व मित्र योग, शुभ योग, रोहिणी नक्षत्र और उच्च राशि के चंद्रमा में मनाया जाएगा। उच्च राशि के चंद्रमा में होने से सकारात्मकता बढ़ेगी।

ज्योतिषी पं. सतीराम गौड़ ने बताया निर्णय सागर पंचांग के अनुसार सूर्य की संक्रांति का पुण्यकाल प्रवेश से 6 घण्टे बाद तक रहता है। इस लिहाज से पुण्यकाल 14 जनवरी को ही मान्य रहेगा जो अपराह्न से रात 8.13 बजे तक फलदायी रहेगा। ऐसे में उन्होंने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 2.28 मिनट पर अपने पुत्र शनि के स्वामित्व वाली राशि मकर में गोचर करेंगे। जो सूर्य मकर राशि में 12 फरवरी तक रहेंगे।

उसके बाद कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। वहीं शनि देव पहले से ही अपनी स्व राशि मकर में विराजमान है। ऐसे बुध 29 दिसंबर को ही धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इससे 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में आते ही सूर्य, शनि, बुध तीनों ग्रहों की एक ही राशि में युति हो जाएगी। यानी इस संक्रांति पर किया गया दान कई गुना अधिक फलदायी होगा।

रंग - रूप, वेश, भाषा चाहे अनेक लेकिन पर्व का उल्लास एक
मारवाड़ी समाज :
मकर संक्रांति पर भगवान को तिल के लड्डू का भोग लगाएंगे। 13 सुहागिनों को सुहाग से जुड़ी 14 चीजें भेंट करने की भी परंपरा है।

गुजराती समाज: संक्रांति के दिन पूजा-पाठ, तिल-गुड़ खाने के अलावा पतंग उड़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन पतंग उड़ाने और दूसरों की पतंग काटने से दुश्मनों का नाश होता है।

तेलुगु समाज: 4 दिन का उत्सव मनाया जाएगा। तमिल और तेलुगु समाज में इस मौके पर पोंगल मनाया जाता है। यह इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि के बाद होली जलाई जाती है और शाम को नन्हें बच्चों पर फल-फूल न्यौछावर जाता है।

पंजाबी समाज: इस दिन लोहड़ी मनाता है। लकड़ियों का अंबार लगाकर आग जलाई जाती है। इसमें गुड़, तिल समर्पित करते है।

मराठी समाज: इस दिन समाज की महिलाएं हल्दी और कुमकुम लेकर एक-दूसरे के घर जाएंगी। तिलक लगाकर गुड़ और के लड्डू बांटने की परंपरा है।

मकर सक्रांति का शुभ समय
सक्रांति: 14 जनवरी दिन में 2.28 में प्रवेश
पुण्यकाल: अपराह्न से रात 8.13 बजे तक।

भास्कर अपील : पतंग उड़ाने में पक्षियों का रखें ध्यान
शहरवासी चाइनीज मांझे का उपयोग नहीं करें। खास तौर पर अभिभावक बच्चों का ख्याल रखें। सुबह 6 से 8 व शाम 6 से 8 बजे तक पतंगबाजी नहीं करें। क्योंकि इस समय पक्षियों की आकाश में आवाजाही रहती है। कोरोना महामारी के चलते सामूहिक पतंगबाजी का आयोजन करने से बचें।

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