डॉ. विनय बोले:डेयरी फार्मिंग में अच्छे मुनाफे के लिए प्रबंधन जरूरी

बाड़मेर16 दिन पहले
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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कृषक व अन्य। - Dainik Bhaskar
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कृषक व अन्य।

बाड़मेर जिले में अकाल के समय पशु ही एक मात्र सहारा बनता है और इस सहारे को ओर मजबूत करने के लिए एवं इसको व्यवसाय का रूप देने के लिए आज इन पशुपालकों को क्षमता वर्धन प्रशिक्षण प्राप्त करने की आवश्यकता है। उक्त स्थिति को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र श्योर, दांता बाड़मेर में तीन दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह बात केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने समापन समारोह में उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कही।

डॉ. विनय ने कहा कि जिले में पशुओं की संख्या के अनुसार यहां के पशुपालक चारे की बुवाई नहीं करते है, इससे पशुओं को उचित पोषण नहीं मिल पाता है, साथ ही पशुपालकों को चारा बाहर से महंगा खरीदना पड़ता है या सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है। इस अवसर पर केन्द्र के पादप सरंक्षण विशेषज्ञ एस.एल.कांटवा ने बताया कि आज डेयरी फार्मिंग करने वाले पशुपालक पशुओं से प्राप्त गोबर एवं मूत्र को अच्छी तरीके से सड़ाकर खाद बनाकर फसलों में प्रयोग करने से अच्छा उत्पादन मिलता है।

इस मौके पर केन्द्र के पशुपालन विशेषज्ञ एव प्रशिक्षण प्रभारी बीएल.डांगी ने बताया कि इस तीन दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण में पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय करके अपनी आमदनी बढाने के लिए पशुपालकों को अपने पशुओं को नियमानुसार खिलाना, समय पर छोटे बछड़ों की देखभाल करना, गर्भित गाय एवं दूध देने वाली गाय को उचित मात्रा में चारा, दाना एवं नमक व खनिज मिश्रण देना चाहिए। पशुओं के दैनिक आहार में अगर अजोला का समावेश किया जाए तो 1-1.5 किलोग्राम दाने को कम किया जा सकता है। इस मौके पर कार्यक्रम सहायक सुनील राखेचा ने प्रतिभागियों को केन्द्र पर संचालित डेयरी एवं बकरी इकाई का भ्रमण करवाया।

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