बाड़मेर मेडिकल कॉलेज की स्टूडेंट ने किया सुसाइड:गर्ल्स होस्टल के रूम नंबर 2 में पंखे से लटकी मिली सैकंड ईयर MBBS की सुनीता मीणा

बाड़मेरएक महीने पहले
मेडिकल कॉलेज की एमएमबीएस स्टूडेंट सुनीता मीणा। फाइल फोटो।

बाड़मेर मेडिकल कॉलेज की MBBS सेकंड ईयर की स्टूडेंट ने गर्ल्स हॉस्टल के 2 नंबर रूम में सुसाइड कर लिया है। रूम से एक सुसाइड नोट भी मिला है। सुसाइड के बाद गर्ल्स हॉस्टल के स्टूडेंट्स सदमे में आ गए हैं। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी।

मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में सोमवार को स्टूडेंट सुनीता कॉलेज जाने के बाद हॉस्टल में करीब 3 बजे आ गई थी। इसके बाद से वह अपने हॉस्टल रूम में थी। देर शाम तक चाय पीने के लिए नहीं आई तो गर्ल्स हॉस्टल के स्टाफ ने रूम का गेट खोलने के लिए आवाज दी। कोई आवाज नहीं आने पर गेट के ऊपर लगी जाली से देखा तो शव पंखे के हुक से लटका हुआ था।

स्टाफ ने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आर के आसेरी को सूचना दी। सूचना मिलने पर एसडीएम रोहित कुमार व पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्टूडेंट के शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवाया गया है।

पापा-मम्मी आप अपना ध्यान रखना

सुनीता ने रूम में एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। हालांकि अभी पुलिस ने इसके बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सुनीता ने सुसाइड नोट में अपने माता-पिता को संबोधित करते हुए लिखा है- पापा-मम्मी मुझे माफ करना। मैं आपके विश्वास पर खरा नहीं उतर पाई। आप अपना ध्यान रखना। Sorry मम्मी-पापा, मैं यह कदम उठा रही हूं।

चुनरी से बनाया फंदा

ग्रामीण थानाधिकारी परबतसिंह के मुताबिक सुनीता ने मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल के रूम में चुनरी का फंदा बनाकर सुसाइड कर लिया। स्टूडेंट सुनीता मीणा 19 साल की थी और झुंझुनूं के खेतड़ी की रहने वाली थी। एक सुसाइड नोट मिला है। परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है।

3 दिसंबर को आई थी घर से

हॉस्टल से मिली जानकारी के मुताबिक स्टूडेंट सुनीता 24 नवंबर को अपने घर झुंझुनूं गई थी। करीब 10 दिन बाद 3 दिसंबर को वापस बाड़मेर आई थी। बाड़मेर आने के तीसरे दिन ही सुनीता ने सुसाइड कर लिया। सुनीता रूम में अकेली रहती थी।

प्रिंसिपल ने स्टूडेंट्स की काउंसिलिंग की

अपनी साथी के सुसाइड के बाद सदमे में आए स्टूडेंट्स को वहां समझाना मुश्किल हो रहा था। हर कोई रो रहा था। ऐसे हालात में प्रिंसिपल ने सभी स्टूडेंट्स को इकट्‌ठा किया और पिता की तरह परिवार के रूप में उन्हें समझाया। उनकी काउंसिलिंग की। काफी देर तक समझाने के बाद स्टूडेंट्स सामान्य स्थिति में आए।