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किसानों की पीड़ा:तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच फंसी 3 जिलों की लाखों बीघा जमीन,न मुआवजा मिला न हक

भारत-पाक बॉर्डर से10 महीने पहले
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  • बीएसएफ गेट नहीं खोल रही कैसे खेती करें
  • बीएसएफ का जवाब: हम गेट खोलने के लिए तैयार

राजस्थान में संभवतया यह पहला मामला है कि बाड़मेर के इन हजारों किसानों के पास अपनी खुद की जमीन तो हैं, लेकिन मालिकाना हक नहीं। वे सिर्फ अपनी जमीन को देख सकते हैं, उस जमीन पर जा नहीं सकते, उसे छू भी नहीं सकते। क्योंकि भारत-पाक विभाजन के बाद वर्ष 1992-93 में राजस्थान के चार जिलों से लगती 1070 किमी. अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर भारत की तरफ से तारबंदी कर दी गई।

इसी तारबंदी के साथ ही राजस्थान के बॉर्डर पर तारबंदी से सटे हजारों किसानों की लाखों बीघा जमीन तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच फंस गई। 28 साल से जीरो लाइन और तारबंदी के बीच फंसी इस जमीन का न तो किसानों को हक मिला और न ही मुआवजा।

किसान जमीन का हक पाने के लिए हाईकोर्ट तक गए, गृह मंत्रालय से लेकर लोकसभा में भी कई बार मुद्दे उठे, लेकिन बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के किसानों का अब तक जमीन का हक नहीं मिल पाया। अकेले बाड़मेर में करीब 11 हजार से ज्यादा बीघा जमीन तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच फंसी हुई है।

केंद्र सरकार से जमीन के मुआवजे की मांग उठी तो अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने किसानों की इस मांग के जवाब में कहा कि इस जमीन का सरकार ने अधिग्रहण नहीं किया है, ये जमीन किसानों की है और उस पर खेती कर सकते हैं। इसके लिए जगह-जगह तारबंदी से उस पार जाने के लिए गेट भी लगाए गए है। इधर, किसानों का आरोप है कि बीएसएफ उन्हें खेती के लिए जाने नहीं दे रही है।

तारबंदी पर खोले गए गेट 5-5 किमी. की दूरी पर है, इसी वजह से उन्हें उस पार जाने में काफी परेशानी होगी। इसके लिए नजदीक में गेट खोले जाए। इधर, बीएसएफ का दावा है कि किसान चाहे तो खेती कर सकते हैं, किसी तरह की रोक टोक नहीं है। हम जहां दूरी है वहां नए गेट भी खोलने के लिए स्वीकृति ले रहे हैं। किसानों को उनकी जमीन पर खेती करने का हक है, हम नहीं रोक सकते हैं।  

  • 28 साल से फंसी हुई है बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के हजारों किसानों की लाखों बीघा जमीन
  • गृह मंत्रालय का जवाब: जमीन अधिग्रहित नहीं की इसलिए मुआवजा नहीं,किसान खेती कर सकते हैं

जानिये कैसे जमीन गई और किसानों को मिला क्या

तारबंदी-जीरो लाइन के बीच भूमि का अधिग्रहण नहीं किया है: गृह मंत्रालय
किसान रमेश गोदारा की ओर से गृह मंत्रालय को एक शिकायत पेश कर बताया कि जीरो पॉइंट और तारबंदी के बीच बाड़मेर के किसानों की हजारों बीघा जमीन फंसी हुई है। सरकार इस जमीन का किसानों को मुआवजा दें या वैकल्पिक तौर पर दूसरी जगह जमीन दें। इसके जवाब में गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन प्रभाग ने 27 सितंबर 2019 को जवाब देते हुए कहा कि तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच वाली भूमि का अधिग्रहण भारत सरकार द्वारा नहीं किया गया है।

जिन किसानों की भूमि तारबंदी के उस पार है और जमीन खेती योग्य है तो वहां पर तारबंदी पर जगह-जगह गेट बनाए गए है। बीएसएफ द्वारा समय-सयम पर गेट खोलने की सुविधा दी गई है, ताकि किसान अपनी जमीन पर खेती कर सके। किसानों की सुरक्षा के लिए किसान गार्ड और अन्य जरूरी कदम उठाए गए है।  

तारबंदी में 100 मी. जमीन गई, मुआवजा सिर्फ डेढ़ मीटर का मिला
वर्ष 1992-93 में भारत-पाक बॉर्डर पर शुरू की गई तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच 100 मीटर जमीन गई थी। इसमें किसानों को सिर्फ 6 फीट जमीन का ही मुआवजा मिला है। बाड़मेर से सटी 225 किमी. लंबी तारबंदी के नीचे आई इस 6 फीट जमीन का 22 लाख 41440 रुपए मुआवजा दे दिया गया। इनमें तहसील शिव की 76.81 किमी. 2,85,450 रुपए, रामसर की 34.15 किमी. 2,25,265 रुपए, चौहटन की 114.211 किमी. 17,22,725 रुपए मुआवजा दिया गया।

हाईकोर्ट ने 2013 में किसानों को जमीन का हक देने का फैसला दिया
किसानों काे हक नहीं मिला तो हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2013 को गृह मंत्रालय, राज्य सरकार, व बीएसएफ को दो माह में किसानों की मांग पर विचार कर निर्णय लेने के लिए कहा गया। इस बात को भी 7 साल हो गए, लेकिन न मुआवजा मिला और न ही खेती के लिए हक।  

2000 किसानों की 11468 बीघा जमीन प्रभावित
तहसील    गांव    काश्तकार    जमीन    मुआवजा

सेड़वा    20    742    4464.05    4.73
रामसर    10    394    1784.11    1.84
चौहटन    12    376    2582.07    1.59
गडरारोड    13    447    2634.03    1.86
कुल    55    1959    11468    10.03 करोड़

किसानों का दर्द हमारी जमीन, हम खेती तक नहीं कर सकते

  • मेरी पुश्तैनी जमीन है, जिसमें 40 बीघा तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच आई हुई है। जिसमें तारबंदी के नीचे आई तीन बीघा जमीन का मुआवजा मिला है, 37 बीघा जमीन मुआवजा नहीं मिला है। -रूपाराम पुत्र लाखाराम, प्रभावित किसान 
  • मेरी 50 बीघा जमीन तारबंदी के उस पार है। सरकारी कागजों है जमीन हमारे नाम है, लेकिन हम खेती तक नहीं कर पा रहे हैं। बच्चों के भी बंटवारे में अब उस जमीन का हक नहीं मिल रहा है।  -भारूराम पुत्र लाखाराम, प्रभावित किसान 
  • मेरी 18 बीघा जमीन तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच दब गई। आज दिन तक न मुआवजा दिया और न ही जमीन को खेती के लिए दे रहे हैं। बीएसएफ के जवान हमें जाने के लिए नहीं दे रहे हैं।  -नवलाराम पुत्र वीरमाराम, प्रभावित किसान
  • हमारीं 11 बीघा जमीन तारबंदी के उस पार दब गई। हमारे को खेती भी नहीं करने दिया जा रहा है। 25 साल से मांग कर रहे है, सरकार और नेता भी ध्यान नहीं दे रहे है। पंजाब और गंगानगर में किसान खेती कर रहे है।  -किशनलाल, प्रभावित किसान।
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