करंट की चपेट मे आने से कर्मचारी की मौत:फ्यूज जोड़ते वक्त हुआ हादसा, 8 घंटे में माने परिजन

बाड़मेर5 महीने पहले
अस्पताल मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे परिजन व समाज के लोग, जनप्रतिनिधियों व प्रशासन वार्ता करते हुए।

बाड़मेर जिले के बाटाडू गांव में ट्रांसफार्मर पर फ्यूज जोड़ रहे एफआरटी कार्मिक करंट लगने से मौत हो गई। मृतक को बायतु अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। मोर्चरी के आगे लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। मृतक के परिजन मुआवजा दिलाने व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। सूचना मिलते ही जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंची और समझाने लगे।

मिली जानकारी के मुताबिक देवीलाल ऊर्फ देवाराम पुत्र गुमनाराम गोदारा निवासी गोदारों की ढाणी केसुंबला एक निजी कंपनी के जरिए बायतु डिस्कॉम एफआरटी टीम में लगा था। शुक्रवार रात को बाटाडू जीएसएस के किशने का तला फीडर के रामपुरा वोडाफोन फीडर पर सिंगल फेज ट्रांसफार्मर पर फ्यूज जोड़ रहा था। इस दौरान करंट आने से पोल से नीच गिर गया और मौत हो गई। पुलिस ने शव को बायतु मोर्चरी में रखवाया। जहां सूचना मिलने पर परिजन भी पहुंचे और शव उठाने से इनकार कर दिया। साथ ही समाज के लोगों ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की।

मृतक देवीलाल। परिजन विभिन्न मांगों को लेकर अड़े रहे और शव नहीं उठाने दिया। समझाइश के दौरान पत्नी को आंगनवाड़ी में नौकरी और 25 लाख रुपए देने की बात पर परिजन माने।
मृतक देवीलाल। परिजन विभिन्न मांगों को लेकर अड़े रहे और शव नहीं उठाने दिया। समझाइश के दौरान पत्नी को आंगनवाड़ी में नौकरी और 25 लाख रुपए देने की बात पर परिजन माने।

8 घंटे तक चली वार्ता

बायतु में शनिवार को एसडीएम जगदीश सिंह आशिया, डिप्टी जग्गू राम पूनिया, डिस्कॉम के एसई अजय माथुर, एक्सईएन अश्विन कुमार जैन, पूर्व राजस्व मंत्री हरीश चौधरी, बायतु प्रधान सिमरथाराम चौधरी, भाजपा नेता बालाराम मूढ़, रालोपा नेता उम्मेदाराम बेनीवाल, गिड़ा प्रधान प्रतिनिधि टीकमाराम लेघा, गिड़ा थानाधिकारी बगडूराम, बायतु थानाधिकारी ललित किशोर पहुंचे। और मौजूद लोगों से समझाइश कर वार्ता की। करीबन 8-10 घंटे तक अलग-अलग दौर में वार्ता चली।

आर्थिक मुआवजे व नौकरी पर बनी सहमति

परिजनों ने एक करोड़ रूपए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। लेकिन संबंधित कंपनी की ओर से नहीं मानने पर पूर्व राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने कंपनी के अधिकारियों को जमकर लताड़ पिलाई। इसके बाद मृतक की पत्नी को आंगनबाड़ी में नौकरी और 25 लाख रुपए देने पर सहमति बनी। इसके बाद मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया।