लंपी से बीमार जिंदा गोवंश को नोच रहे कोए:घावों में पड़े कीड़े, डॉक्टर छोड़ नहीं ले रहा कोई सार संभाल

बाड़मेर5 महीने पहले
जीवित गाय इतनी बेबस कोए चोच से नोच रहे लेकिन उठने की हिम्मत नहीं। जिम्मेदार मूकदर्शक।

लंपी स्किन बीमारी से गोवंश जिम्मेदार अधिकारियों की वजह से तड़प-तड़प कर मर रही है। शहर में बीमारी की वजह से गाय उठ नहीं पा रही है और कोए नोच रहे है। इससे शरीर पर बड़े-बड़े छेद हो गए। कीड़े पड़ने के साथ-साथ धीरे-धीरे खून निकल रहा है। दर्द के मारे गाय आंखों में आंसू निकालने के अलावा कुछ नहीं कर पा रही है। वहीं, गोवंश को खाने के लिए हरा चारा छोड़कर रेत व सूखा चारा खिलाया जा रहा है। ऐसा कहे कि करीब 25-30 गोवंश को मरने के लिए छोड़ दिया है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। तड़ता देख इन गोवंश को बचाने के लिए युवाओं की टीम दिन रात एक कर रही है। बीते 10 दिनों में सुबह-शाम श्मशान घाट की गोशाला में आते है और गोवंश का मलहम लगाकर पट्‌टी कर रहे है और देशी दवाईयां पिला रहे हैं।

बेसहारा, बेबस गोवंश पीड़ा इतनी आंखों से निकल रहे आंसू।
बेसहारा, बेबस गोवंश पीड़ा इतनी आंखों से निकल रहे आंसू।

दरअसल, बाड़मेर शहर के श्मशान घाट में आवारा पशुओं के लिए गोशाला बनाई गई है शहर में आवारा घूम रहे पशुओं को इसके अंदर रखा जाता था। अब इसमें लंपी स्किन बीमारी से ग्रस्ति गोवंश को इसके अंदर रखा गया है, लेकिन इन गोवंश की सार संभाला लेने वाला कोई नहीं है। बीमारी से ग्रस्ति गोवंश एक बार नीचे बैठने के बाद वापस उठ नहीं पाती है। बेबस गोवंश के शरीर में गाठ होने के बाद घाव होते है और फिर कोए उनको नोंच रहे है। बीमारी के कारण गोवंश में इतनी ताकत नहीं होती है कि वह उठ जाए। कोए नोच-नोच कर गोवंश के बड़े-बड़े छेद (घाव) कर दिए। इससे कीड़े पड़ गए। जब भास्कर ने गोशाला पहुंचकर जमीनी हकीकत देखी तो गायों का दर्द देखने वाला कोई जिम्मेदार नहीं दिखा। बीते 10 दिनों से जय माताजी चैरिटेबल ट्रस्ट की टीम गोवंश का इलाज करने के साथ सार-संभाल लेते नजर आए।

सरकारी गोशाला में 30 गोवंश लंपी स्किन से बीमार है लेकिन नहीं ले रहा है जिम्मेदार सुध।
सरकारी गोशाला में 30 गोवंश लंपी स्किन से बीमार है लेकिन नहीं ले रहा है जिम्मेदार सुध।

लंपी बीमार की गाय केवल बाडाबंदी

ट्रस्ट के मोती जैन का कहना है कि हमारी टीम को 10 दिन पहले गोशाला आकर देखा तो गोवंश की हालात बहुत ही गंभीर थी। श्मशान घाट में न तो गोवंश को चारा नहीं मिल रहा है मिल रहा है तो सूखा व रेत वाला मिल रहा है। पानी की भी व्यवस्था नहीं है। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार लंपी स्किन से ग्रस्ति गोवंश का इलाज किया जा रहा है। हमारे आने के बाद एक बार भी डॉक्टर नहीं आया है। यहा केवल लंपी से बीमार गोवंश की बड़ा बंदी हो रही है। इलाज व सार संभाला के नाम पर कुछ भी नहीं है। चारा प्रशासन द्वारा दिया जा रहा है लेकिन कचरे से भी गया गुजरा है।

ट्रस्ट के युवाओं ने सुनी पीड़ा, घावों पर लगा रहे मरहम।
ट्रस्ट के युवाओं ने सुनी पीड़ा, घावों पर लगा रहे मरहम।

कोए नोच रहे नहीं ले रहे सार संभाल

कपिल वडेरा का कहना है कि ट्रस्ट की बाड़मेर में 10 युवाओं की टीम है। जो जिले में जगह-जगह जाकर करीब एक माह से गोवंश को बचाने का काम रहे है। गुजरात से होम्योपैथिक दवाइ हमारे ट्रस्ट के द्वारा उपलबध करवाई गई है। गायों के देने से कुछ राहत भी मिल रही है। बीमारी से ग्रस्ति गोवंश चल नहीं पा रही है उन गायें को कोए नोंच रहे है। जो घाव हो रखे है उसके बार-बार मलहम व पटि्टयां कर रहे है लेकिन कोए के नोचने की वजह से सही नहीं हो पा रहे है। सूखा चारा है। बीमारी में पौष्टिक आहार व हरा चारा खिलाना चाहिए वह न हीं मिल रहा है।

मौत का आंकड़ा 50 हजार लेकिन सरकारी 3 हजार

पश्चिमी राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज से हजारों गौवंश की मौत हो चुकी है। जिले बाड़मेर में इस माह में रोजना करीब 200 गौवंश की मौत हो रही है। लंपी स्किन बीमारी आने के बाद से करीब 50 हजार से ज्यादा गौवंश की मौत हो चुकी है। वहीं सरकारी आंकड़ा तीन हजार के आसपास है। जिले की अलग-अलग गौशाला में 5 हजार गौवंश की मौत हुई है। वहीं जिले में 689 ग्राम पंचायत है हर ग्राम पंचायत में 50 से 100 गौवंश की मौत हुई है।