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ग्रहण:10 जून काे कंकणाकृति का सूर्यग्रहण, राशियों पर असर नहीं

बाड़मेर12 दिन पहले
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ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष में 10 जून को 16 दिन में दूसरा ग्रहण होगा। इसी दिन वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। ज्योतिषियों का कहना है यह ग्रहण 148 साल बाद वक्री शनि के साथ कंकणाकृति का होगा। भारत में दिखाई नहीं देने से इसका भारत व राशियों पर असर नहीं होगा। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका के उत्तर पूर्वी भाग, उत्तरी एशिया, उत्तरी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा।

ज्याेतिषविद के अनुसार देश के समयानुसार दोपहर 1:42 से शाम 6:43 बजे तक रहेगा। इसके पहले 26 मई को भारत के पूर्वी क्षेत्र, पश्चिम बंगाल में चंद्र ग्रहण वैशाख पूर्णिमा को दिखाई दिया था। आने वाला सूर्य ग्रहण भी भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए उसका कोई भी असर मान्य नहीं होगा। राशि पर भी हमारे देश में कोई असर मान्य नहीं होगा।

इस बार सूर्य ग्रहण के साथ शनि जयंती भी है। शनि के अपनी स्वयं की राशि मकर में रहते एवं शनि जयंती के साथ मकर में वक्री शनि के साथ सूर्यग्रहण इससे 148 साल पहले 26 मई 1873 में हुआ था। यदि वृषभ में सूर्य या चंद्र ग्रहण होता है तो गौ का पालने करने वाले, चतुष्पदों और पूजनीय मनुष्यों को पीड़ित करता है। यह सूर्य ग्रहण वृषभ राशि में होगा एवं नक्षत्र मृगशिरा होगा।

मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। मकर राशि में स्थित वक्री शनि की पूर्ण दृष्टि मीन कर्क राशि में स्थित मंगल पर पड़ रही है। मंगल की गुरु पर दृष्टि एवं सूर्य-चंद्र, राहु एवं बुध की युति है। यह ग्रहों की स्थिति बड़े भूकंपन का कारण बनती है। इसके साथ ही अन्य प्राकृतिक आपदा आने की संभावना भी हो सकती है।

इस साल शनि भी मकर राशि में वक्री है एवं नीच का मंगल कर्क राशि में है। जानकाराें के अनुसार 10 जून के आसपास कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आने की पूर्ण आशंका है। इसमें भूकंप एवं सुनामी मुख्य है।

एक महीने में दो ग्रहण
एक महीने में दाे ग्रहणाें से यह अंदेशा कुछ क्षेत्रों में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक एक माह व कुछ क्षेत्रों अमावस्या से अमावस्या तक एक माह मानते हैं। इस बार ज्येष्ठ की पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण एवं आषाढ़ की अमावस्या पर सूर्य ग्रहण एवं आषाढ़ की पूर्णिमा पर पुनः चंद्र ग्रहण है। दोनों मतों से देखें तो एक महीने में दो ग्रहण आ रहे हैं।

मान्यता है कि यदि एक ही महीने में सूर्य-चंद्र दोनों का ग्रहण हो तो सेनाओं में हलचल हाे सकती है। लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता इसलिए नहीं है कि दोनों ग्रहण हमारे देश में दिखाई नहीं देंगे।

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