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रद्दी कागजों से बना रहे स्टेच्यू:कोरोनाकाल में श्यामलाल घर में रद्दी कागज से बना रहे महापुरुषों के स्टेच्यू

बाड़मेर6 दिन पहले
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बाड़मेर. रद्दी कागजों को गोंदकर बुजुर्ग ने तैयार किए महापुरुषों के स्टेच्यू। - Dainik Bhaskar
बाड़मेर. रद्दी कागजों को गोंदकर बुजुर्ग ने तैयार किए महापुरुषों के स्टेच्यू।

लॉकडाउन में घर पर बैठे 74 वर्षीय श्यामलाल सोनी रद्दी कागजों को गोंदकर महापुरुषों के स्टेच्यू बना रहे हैं। शुरूआत से ही पेंटिंग के शौकीन रहे सोनी इन दिनों कोरोनाकाल में गाइडलाइन की पालना करते हुए घर पर कठपुतलियां, स्टेच्यू और पेंटिंग का काम कर रहे हैं। सोनी किसी का फोटो देखकर भी हूबहू पेंटिंग कर सकते हैं। 14 साल पहले गांधी चौक सीनियर सैकंडरी स्कूल में साइंस टीचर से रिटायर्ड हुए हैं।

सेवा निवृति के बाद समय-समय पर घर में बैठे हुए पेंटिंग करते रहते हैं। यहां तक की उनके बेटे-पौतों तक को देख-देख कर पेंटिंग बना रखी है। श्यामलाल सोनी ने कहा कि वो पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के हाथों गुवाहटी में सम्मानित हो चुके हैं। बाल वैज्ञानिक तैयार करने में उन्होंनें 1993 में गोल्ड मैडल हासिल किया था। 20 बाल वैज्ञानिकों को तैयार किया था।

अब काेरोना चल रहा है, ऐसे दौर में घर में बैठे-बैठे रद्दी कागज को मैथी के साथ गोंद कर उनका पेस्ट तैयार करते हैं। इसके बाद महापुरुषों के पुतले का आकार देकर उसमें रंग-रोगन कर डिजाइन दे देते हैं। हूबहू पुतलों को कई कार्यक्रमों के लिए भी उन्होंने निशुल्क भेंट किया है। 1971 से पेंटिंग का काम कर रहे हैं। अगर किसी को देखकर उसका हूबहू फोटो भी तैयार कर देते हैं।

उन्होंने इस काेरानाकाल में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, डॉ. राधा कृष्ण, अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के स्टेच्यू तैयार किए हैं। बच्चों के साथ घर में बैठे हुए रोज कुछ नया करने के लिए पेंटिंग करते रहते हैं। 74 साल की उम्र में सोनी की कलाकारी की हर कोई प्रशंसा कर रहा है।

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