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VIDEO, रेगिस्तान में बच्चों को पढ़ाने के लिए ऊंट सवारी:ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जिन ढाणियों में नेटवर्क नहीं, ऐसे 100 बच्चों को उनके घर जाकर पढ़ा रहे, ऊंट से रेतीले धोरों में तय कर रहे 10 से 12 किलोमीटर का सफर

बाड़मेरएक महीने पहले
धोरों में ऊंट पर जाते शिक्षक।

कोरोना के इस संक्रमण काल में सबसे ज्यादा बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। कोरोना की दूसरी लहर का पीक थमने के बाद 21 जून से स्माईल 3 प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया गया है। इस सारा प्रोजेक्ट ऑनलाइन है। लेकिन प्रदेश के बाड़मेर जिले के कुछ ऐसी भी ढाणियां हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता और न ही वहां जाने के लिए कोई पक्की सड़क है। ऐसे में स्कूल के टीचर ऊंट पर 10 से 12 किलोमीटर का सफर तय कर बच्चों तक पहुंच रहे हैं।

सप्ताह में तीन बार, जाएंगे इन बच्चों तक
इन बच्चों के घर तक पहुंचने के लिए टीचर की टीम को रेतीले धोरें पार करने होते हैं। भीमथल के आसपास करीब सिलगण चिमाणी गोदारों की ढाणी, डालुणियों का वास, डेर गांवो में सबसे ज्यादा नेटवर्क की समस्या है। स्कूल प्रिंसिपल रूपसिंह जाखड़ अब तक करीब 100 बच्चों को चिह्नित कर चुके हैं और इनमें से 15 से 20 बच्चों तक पहुंचे हैं। उनका कहना है कि अभी तीन दिन हुए है। अब सप्ताह में दो से तीन दिन तक बच्चों के पास जाएंगे।

धोरों मेें बच्चों को पढ़ाते टीचर
धोरों मेें बच्चों को पढ़ाते टीचर

शिक्षामंत्री ने ट्‌वीट कर हौसला बढ़ाया
शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षकों की इस पहल की सराहना की। उन्होंने उनके नवाचारों की तारीफ करते हुए लिखा कि 'तमाम चुनौतियों के बावजूद आपकी कर्तव्यपरायणता के जज़्बे को सलाम'।

पेरेंट्स को भी कर रहे हैं जागरूक
पीईईओ क्षेत्र भीमथल के प्रधानाचार्य रूपसिंह जाखड़ व शिक्षकों की टीम ने दूर-दराज के गांवों में आने-जाने का कोई साधन नहीं होने पर ऊंटों से ढाणियों में पहुंचे और बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं। साथ ही पेरेंट्स को भी बच्चों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

जरूरतमंद बच्चों की कर रहे हैं सहायता
कोरोनाकाल के दौरान शिक्षकों द्वारा जरूरतमंद बच्चों की भी सहायता की जा रही है। मास्क व सैनेटाइजर के साथ ही उन्हें कॉपी, किताबें, पेंसिल व पेन समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। भीमथल के सरपंच रामलाल डऊकिया का कहना है कि प्रिंसिपल समेत उनकी टीम ने अनूठी पहल करते हुए धोरों में बसे हुए स्टूडेंट को शिक्षा दे रहे हैं।
यह है शिक्षकों की टीम
प्रिंसिपल रुपसिंह जाखड़ ने बताया कि पीईईओ क्षेत्र के कुछ चुनिंदा शिक्षकों ने यह बेहतरीन कार्य किया। इस कार्य में बीएलओ मुकनाराम ढाका, बिहारीलाल ढाका ब बिरमाराम बाना की विशेष भूमिका रही। सीलगन के ग्रामीण चनणाराम मेघवाल ,प्रतापराम, पोकराराम तालनिया व घमंडराम रेबारी की विशेष भूमिका रही।

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