हेलिकॉप्टर में खराबी आई तो 6 घंटे लेट हुई विदाई:बाड़मेर में पहली बार दुल्हन को लेकर हवाई रास्ते से आया दूल्हा, हेलिपैड पर देखने उमड़े लोग

बाड़मेरएक महीने पहले
हेलिकॉप्टर से दुल्हन को विदा कर लाया दूल्हा।

बाड़मेर में पहली बार दुल्हन को विदा कराकर कोई दूल्हा हेलिकॉप्टर में बैठाकर पहुंचा। हालांकि इस कारण दुल्हन की विदाई 6 घंटे देरी से हो पाई। शादी के बाद हेलिकॉप्टर से विदा कराकर दुल्हन को लाने वाला दूल्हा बेहद खुश था, क्योंकि ऐसा करने से उसके माता-पिता का सपना पूरा हो गया।

बाड़मेर के रहने वाले डॉ. तरुण की शादी सोमवार को थी। मंगलवार तड़के तक फेरे हुए। इसके बाद सुबह 9 बजे हेलिकॉप्टर से दुल्हन की विदाई होनी थी। इससे कुछ देर पहले ही सूचना आई कि जो हेलिकॉप्टर बुक कराया गया था, उसमें तकनीकी खराबी आ गई है, इसलिए अब दूसरा भेजा जा रहा है। यहां बाड़मेर में साढ़े नौ बजे बारात के स्वागत में हेलिपैड पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच चुके थे। ज्यादातर पहली बार आने वाले हेलिकॉप्टर को देखने आए थे। बाड़मेर से बारात बिजराड के बिंढाणी गांव गई थी।

फिर 6 घंटे बाद हुई विदाई

शादी के बाद बिजराड़ के बिंढाणी गांव से दूल्हा हेलिकॉप्टर में बैठाकर दुल्हन विदा कर अपने घर लेकर पहुंचा। हेलिकॉप्टर बाड़मेर के जसदेर धाम दोपहर 3:30 बजे पहुंचा। हेलिकॉप्टर देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ गया। दुल्हा डॉ. तरुण दुल्हा ने कहा कि मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मुझे हर जन्म में यही माता-पिता मिले। आज मेरे माता-पिता का सपना पूरा हो गया है। मुझे बहुत ही ज्यादा खुशी है।

कार से दुल्हन के गांव पहुंची थी बारात

बाड़मेर शहर निवासी डॉ तरुण की शादी बिजराड़ बिंढाणी गांव निवासी धीया के साथ तय हुई थी। सोमवार को दुल्हे की बारात कार व बस से बिंढाणी गांव पहुंची थी। उसी रात को दोनों की शादी हो गई थी। बिंढाणी गांव से दुल्हन व दुल्हे की विदाई करीब 3 बजे हुई। बाड़मेर जसदेर धाम में करीब 3:30 बजे दुल्हन-दुल्हे का हेलिकॉप्टर पहुंचा। हेलिपैड से दुल्हन व दूल्हे को कार में घर पर लेकर गए।

हेलिकॉप्टर से नीचे उतरती दुल्हन और सांस दुल्हन को लेने पहुंची।
हेलिकॉप्टर से नीचे उतरती दुल्हन और सांस दुल्हन को लेने पहुंची।

हर जन्म मुझे यहीं माता-पिता मिले

दूल्हे डॉ तरुण का कहना है कि पिता की इच्छा थी कि उनके डॉक्टर बेटे की शादी में कुछ अलग हो। इसलिए उन्होंने बहू को विदा कर लाने के लिए लाखों रुपए में हेलिकॉप्टर बुक कराया। हेलिकॉप्टर से उतरने के बाद पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं था। दूल्हे ने कहा कि मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मुझे हर जन्म में यहीं माता-पिता मिले। मेरी शादी को यादगार बना दिया। दोनों हेलिपैड पर हजारों की तादाद में लोगों को हुजूम उमड़ गया।

हेलिकॉप्टर से दुल्हन लेकर बाड़मेर पहुंचा दुल्हा
हेलिकॉप्टर से दुल्हन लेकर बाड़मेर पहुंचा दुल्हा

हेलिकॉप्टर से दुल्हन व दुल्हे को देखने उमड़ा हुजूम

बाड़मेर जसदेर धाम के पास मैदान में सुबह से सैकड़ों लोग दुल्हन-दुल्हे के हेलिकॉप्टर में आने का इंतजार कर रहे थे। हेलिपैड पर दुल्हन व दुल्हे के रिश्तेदार सज धज कर पहुंचे। हेलिकॉप्टर से दुल्हन व दुल्हा उतरने के बाद लोग फोटो व सेल्फी खिंचवाने के लिए हेलिकॉप्टर के पास पहुंच गए। एक बार तो हेलिकॉप्टर लैडिंग होने के बाद वापस आसमान में उड़ाना पड़ा। भीड़ को कंट्रोल करके दुबारा लैडिंग करवाई गई।

बाड़मेर शहर के जसदेर धाम में लैडिंग होता हेलिकॉप्टर।
बाड़मेर शहर के जसदेर धाम में लैडिंग होता हेलिकॉप्टर।

माता-पिता का सपना हुआ पूरा

दूल्हे के रिश्तेदार मीना मंसूरिया का कहना है कि आज हमें बहुत खुशी है कि दुल्हन व दुल्हा हेलिकॉप्टर में बैठकर आ रहे है। सुबह से हम लोग इंतजार कर रहे है। मंगलवार को हेलिकॉप्टर से दुल्हा व दुल्हन के बाड़मेर पहुंचने के बाद पूरे परिवार का सपना पूरा हो गया है। डॉ. तरुण पन्नू परिवार के साथ मंसूरिया कॉलोनी में रहते हैं। उनकी बारात यहां से सड़क मार्ग से सोमवार को बिंढाणी गए थे। दुल्हन धीया के साथ सोमवार रात फेरे लिए थे।

पिता ने कहा- खुशी का ठिकाना नहीं

दूल्हे के पिता तिलाराम का कहना है कि उनके इकलौता बेटा है और बेटे की शादी का यादगार बनाना चाहता था। पत्नी पार्वती का सपना था कि बेटे की बहु को हेलिकॉप्टर में बैठा कर घर लेकर आऊं। आज सपना पूरा हो गया। दूल्हे के पिता व मां सरकारी टीचर है। हेलिकॉप्टर से बाड़मेर पहुंचने के बाद मेरे परिवार के साथ दोस्तों में खुशी का ठिकाना नहीं था।

फोटो : अश्वनी रामावत

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