शिविर आयोजन:गीता में वर्णित कर्मों पर आधारित है संघ की साधना

बाड़मेरएक महीने पहले
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श्री क्षत्रिय युवक संघ का बालकों का उच्च प्रशिक्षण शिविर 19 से 29 मई तक आलोक आश्रम बाड़मेर में चल रहा है। - Dainik Bhaskar
श्री क्षत्रिय युवक संघ का बालकों का उच्च प्रशिक्षण शिविर 19 से 29 मई तक आलोक आश्रम बाड़मेर में चल रहा है।

श्रीमद् भागवत गीता के 18वें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण द्वारा कर्म के होने के लिए पांच कारण बताए गए हैं। यह बात संघ के संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर ने आलोक आश्रम में चल रहे उच्च प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन शनिवार को अपने प्रभात संदेश कहीं। उन्होंने कहा कि प्रथम कारण है अधिष्ठान अर्थात क्षेत्र। श्री क्षत्रिय युवक संघ के स्वयंसेवक के लिए समाज ही अधिष्ठान अर्थात कार्यक्षेत्र है। दूसरा है कर्त्ता और तीसरा है करण अर्थात साधन।

स्वयंसेवक के रूप में हम ही कर्त्ता है और हमारे पास साधन के रूप में शरीर, मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार हैं जिनके माध्यम से कर्म घटित होता है। चौथा है विविध प्रकार की चेष्टाएं अर्थात प्रयत्न। हम प्रयत्नशील हैं इसीलिए यहां इस शिविर में आए हैं। पांचवा कारण है दैव अर्थात प्रारब्ध। पूर्व जन्मों में किए हुए कर्मों के फल से प्रारब्ध का निर्माण होता है, यह हमारे हाथ में नहीं है। प्रारब्ध यदि पक्ष में ना हो तो भी कर्म नहीं होता। हमारा जन्म भारत जैसे देश में हुआ है, क्षत्रिय कुल में हुआ है और हमें श्री क्षत्रिय युवक संघ में आने का अवसर भी प्राप्त हुआ है तो इसका अर्थ है कि हमारा प्रारब्ध भी हमारे अनुकूल हैं।

इस प्रकार हमारे पास कर्म के लिए आवश्यक सभी पांच कारण उपस्थित हैं। हमें केवल यह दृढ़ निश्चय करना है कि यह काम हमें करना ही है। सामाश्या के दौरान ‘मेरी साधना’ पुस्तक पर चर्चा करते हुए बताया कि जिसके मन में समाज के प्रति वेदना होती है वह वेदना उसे बैठा नहीं रहने देती किंतु यदि ऐसे व्यक्ति को सही मार्ग न मिले तो उसकी ऊर्जा व्यर्थ या हानिप्रद भी हो सकती है। श्री क्षत्रिय युवक संघ का बालकों का उच्च प्रशिक्षण शिविर 19 से 29 मई तक आलोक आश्रम बाड़मेर में चल रहा है जिसमें संघ प्रमुख लक्ष्मण सिंह बैण्याकाबास के संचालन में देशभर के 400 से अधिक युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

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