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भास्कर ब्रेक्रिग:तत्कालीन कलेक्टर विश्राम मीणा ने किया नियम विरुद्ध भू-रूपातंरण, उद्योग के लिए आरक्षित 13 बीघा जमीन का कृषि में कर दिया भू-उपयोग परिवर्तन

बाड़मेर17 दिन पहलेलेखक: पूनमसिंह राठौड़
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बाड़मेर.शहर के सिणधरी चौराहे के पास औद्योगिक प्रयोजनार्थ आरक्षित जमीन पर बनी दुकानों के आगे डाली गई निर्माण सामग्री। - Dainik Bhaskar
बाड़मेर.शहर के सिणधरी चौराहे के पास औद्योगिक प्रयोजनार्थ आरक्षित जमीन पर बनी दुकानों के आगे डाली गई निर्माण सामग्री।

शहर के सिणधरी चौराहे पर स्थित रीको की औद्योगिक प्रयोजनार्थ आवंटित जमीन को नियम विरुद्ध कृषि भूमि में भू-परिवर्तन का मामला सामने आया है। करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन का कॉमर्शियल उपयोग करने में रीको के नियमों की अड़चन आने पर जमीन को औद्योगिक से कृषि में भू-रूपातंरण करवा दिया। इसके बाद यूआईटी में उक्त जमीन को आवासीय प्रयोजनार्थ आवेदन कर दिया। तत्कालीन कलेक्टर विश्राम मीणा ने उद्यमी पर मेहरबानी दिखाते हुए रीको की आपत्ति के बावजूद बेशकीमती जमीन का कृषि में भू-उपयोग परिवर्तन कर दिया।

राजस्थान राज्य औद्योगिक एवं खनिज विकास निगम लिमिटेड ने खसरा न. 3056/1551 की 13.18 बीघा जमीन राठी वूलटेक्स इंडस्ट्रीज को वूलन मिल की स्थापना के लिए 9 अगस्त 1979 को आवंटित की थी। निगम से लिए गया ऋण फर्म नहीं चुका पाई तो राजस्थान वित्त निगम ने औद्योगिक जमीन की नीलामी कर दी। इस पर ओमप्रकाश पुत्र पुरुषोतमदास मेहता निवासी बाड़मेर ने 18 मई 2002 को नीलामी से उक्त जमीन की सेल डीड का पंजीयन करवा दिया।

इसके बाद उक्त जमीन पर लीज धारक ने दुकानों का निर्माण करवा दिया। औद्योगिक जमीन के कॉमर्शियल उपयोग की शिकायतों के बाद काम रोक दिया। इसके बाद 1 फरवरी 2021 को तत्कालीन कलेक्टर विश्राम मीणा ने आदेश क्रमांक प.12 (3)(184)राज/2020/600 जारी कर औद्योगिक जमीन को ओमप्रकाश मेहता के नाम से कृषि भूमि के रूप में दर्ज करने निर्देश दिए। इसकी पालना में बाड़मेर तहसीलदार ने उक्त जमीन ओमप्रकाश मेहता के नाम से कृषि जमीन का नामांतरण भर दिया।

यूं समझें बेशकीमती जमीन के भू-रूपांतरण का खेल
सिणधरी चौराहे के पास स्थित 13 बीघा जमीन स्टेट हाइवे सिणधरी व एनएच-68 के पास होने से बेशकीमती है। रीको की गाइडलाइन के अनुसार औद्योगिक प्रयोजनार्थ नीलाम जमीन को कृषि, आवासीय व व्यवसायिक प्रयोजनार्थ उपयोग नहीं कर सकते हैं। इस स्थिति में जमीन मालिक ने पहले दुकानों का निर्माण करवाया, लेकिन रीको की आपत्ति के बाद काम बीच में ही रोकना पड़ा। जमीन के व्यवसायिक उपयोग के लिए रीको ने मना किया तो कलेक्टर से जमीन की किस्म बदलवा दी। अब यूआईटी में आवासीय प्रयोजनार्थ फाइल लगा दी है। आवासीय में भू-उपयोग परिवर्तन के बाद फिर कॉमर्शियल में भू-रूपातंरण की तैयारी है।

यह है जमीन का राजस्व रिकॉर्ड, वर्ष 1979 में हुआ था आवंटन
सिणधरी चौराहे के पास खसरा न. 1551 रकबा 40 बीघा जमीन सोना वल्द नारणा कौम वजीर के नाम दर्ज थी। सोना ने जरिए पंजीकृत दस्तावेज संख्या 573/75 से खसरा न. 1551 में से रकबा 13 बीघा शंकरलाल, हस्तीमल पुत्र सुरतानमल के नाम विक्रय की। उक्त जमीन कलेक्टर बाड़मेर के आदेश क्रमांक 1194/04-6-1979 में औद्योगिक प्रयोजनार्थ आरक्षित की गई। नामांतरण सं. 1085 की स्वीकृति से उद्योग विभाग जयपुर के आदेश की पालना में राजस्थान राज्य औद्योगिक एवं खनिज विकास निगम जयपुर के नाम दर्ज किया गया। राजस्थान राज्य औद्योगिक एवं खनिज विकास निगम ने उक्त जमीन राठी वूलटैक्स इंडस्ट्रीज को वूलन मिल की स्थापना के लिए 9 अगस्त 1979 को आवंटित की गई।

एक्सपर्ट व्यू: औद्योगिक प्रयोजनार्थ जमीन का भू-उपयोग परिवर्तन गलत है
रीको क्षेत्र में या अन्य सरकारी संस्थान की ओर से औद्योगिक प्रयोजनार्थ आरक्षित जमीन का भू-उपयोग परिवर्तन का प्रावधान नहीं है। आवंटित या नीलामी से खरीदी गई औद्योगिक जमीन का मालिक अगर व्यवसायिक गतिविधियां जैसे पेट्रोल पंप या अन्य काम के लिए उपयोग लेना चाहता है तो रीको में आवेदन करना होता है। इसके बाद अतिरिक्त शुल्क जमा करवाने के बाद रीको की अनुमति से व्यवसायिक काम संचालित किया जा सकता है। जमीन की किस्म बदल नहीं सकते हैं। ऐसा अगर हुआ है तो नियम विरुद्ध है।
-घनश्याम गुप्ता, सेवानिवृत जिला उद्योग अधिकारी।

मेरे ध्यान में नहीं है मामला
सिणधरी चौराहे पर औद्योगिक प्रयोजनार्थ आरक्षित जमीन को कृषि में भू-उपयोग परिवर्तन का मामला मेरे ध्यान में नहीं हैं। नियमानुसार जमीन की किस्म नहीं बदली जा सकती है।
-आरसी वैष्णव, एसआरएम रीको।

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