अनदेखी का असर:लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 27 साल पहले लाखों रुपए खर्च कर बनाए झोंपे-पड़वे, अब खंडहर

बाड़मेरएक महीने पहलेलेखक: लाखाराम जाखड़/नरपत रामावत
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राजस्थानी लोक कला व संस्कृति को बढ़ावा देने व विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 1996-97 में शिव कस्बे में 10 बीघा जमीन पर टेड्रिशनल झोंपड़ों का निर्माण करवाया था। पर्यटन विभाग राजस्थान ने विदेशी पर्यटकों को लुभाने और उनके ठहराव के लिए राजस्थानी लोक कला व संस्कृति के रूप में झोंपड़े और कच्चे कमरे बनाए थे। शिव मुख्यालय पर इसके लिए 10 बीघा जमीन आरक्षित की गई।

तत्कालीन पर्यटन विभाग के सचिव रहे ललित के पंवार ने इसकी शुरूआत की थी। इसके बाद शिव मुख्यालय पर लाखों रुपए खर्च कर पर्यटन विभाग ने 12 झोंपड़े, ग्रामीण कल्चर के कमरे बनाए थे। विदेशी पर्यटकों की टीम एनजीओ लोक रंग परिषद के माध्यम से बाड़मेर के शिव पहुंचते थे। जहां इन झोंपे में 7 दिन तक ठहराव के दौरान लोक कला व संस्कृति से रूबरू होते थे।

इसके बाद आसपास की आंगनवाड़ियां, स्कूल में जाकर विदेशी पर्यटक बच्चों को पढ़ाने के अलावा वहां बच्चों को कई तरह के आइटम भी वितरित करते थे। करीब 15-16 साल तक इन झोंपड़ों में पर्यटन आते रहे। 2015-16 के बाद धीरे-धीरे ये झोंपे खंडहर में तब्दील होते गए। लोक रंग परिषद की ओर से इनकी देखरेख और मरम्मत नहीं की गई। इसके बाद अब पिछले 5-6 साल से ये खंडहर में तब्दील है। मुख्य हाइवे पर करोड़ों रुपए की जमीन पर बने ये झोंपे अब खंडहर बनने के साथ ही बदहाली के शिकार है।

लोक संस्कृति को बढ़ावा देने फिर से तैयार करवाएंगे
शिव मुख्यालय पर लोक कला व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए झोंपे तैयार किए गए थे। वर्तमान में वो क्षतिग्रस्त हो गए है। कोरोनाकाल के दौरान से पर्यटकों की आवाजाही बंद हो गई थी, इसके बाद से यहां पर्यटन नहीं आ रहे है। अब जल्द ही इन झोंपों को फिर से मरम्मत करवाकर तैयार करवाया जाएगा, ताकि वापिस पर्यटन आए। - कुसुम शर्मा, सचिव लोक रंग परिषद जयपुर।

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