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वीरात्रा मेला स्थगित:कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते वीरात्रा मेला स्थगित, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र से पहुंचते है श्रद्धालु, दुकानदारों को होगा करोड़ों का घाटा

बाड़मेर2 महीने पहले
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मां वांकल वीरात्रा माता। - Dainik Bhaskar
मां वांकल वीरात्रा माता।

वांकल वीरात्रा मंदिर में लगने वाला भाद्रपद का मेला कोरोना की संभावित तीसरी लहर के चलते स्थगित कर दिया गया है। वीरात्रा ट्रस्ट ने 18 से 20 सिंतबर को लगने वाले तीन दिवसीय मेले को लगातार दूसरे साल भी स्थगित कर दिया है। इस मेले में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और आंधप्रदेश के अलग-अलग जिलों से श्रद्धालु आते हैं।

दरअसल, विरात्रा मेला हर साल तीन माह भाद्रपद (भादो), चैत्र और माघ मास में लगता है। इन तीनों माह में तेरस (त्रयोदशी), चौदस (चतुर्दशी) और पूनम (पूर्णिमा) को लगता है। मेले में जिले के अलावा जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, बीकानेर, जयपुर, पाली, सिरोही, जालोर, उदयपुर, राजसमंद सहित गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और आंधप्रदेश से भक्त आते हैं और मां नवदुर्गा के शक्तिपीठ वांकल वीरात्रा माता के दर्शन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भक्त जो भी मन्नत मांगता है वो पूरी होती है। खाली हाथ कोई नहीं जाता है।

चौहटन क्षेत्र में वांकल माता वीरात्रा मंदिर।
चौहटन क्षेत्र में वांकल माता वीरात्रा मंदिर।

मां नवदुर्गा के शक्तिपीठ वांकल वीरात्रा माता मंदिर में लगने वाला भाद्रपद का मेला कोरोना की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर स्थगित किया गया है। वीरात्रा माता धर्मार्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष सगतसिंह परो ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण मेला पिछले साल भी स्थगित किया गया था। क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला भाद्रपद शुक्ल तेरस, चौदस व पूनम को लगता है। यह मेला इसी माह की 18 से 20 तारीख को लगना था। राज्य सरकार की गाइडलाइन की पालना के मद्देनजर मेला स्थगित किया गया है।

पहाड़ों और धोरों के बीच वांकल वीरात्रा मंदिर।
पहाड़ों और धोरों के बीच वांकल वीरात्रा मंदिर।

इस मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं
भाद्रपद मास में लगने वाले मेले में सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। इन तीन दिनों में करीब 3 लाख श्रद्धालु राजस्थान सहित अलग-अलग राज्यों से आते हैं। मां वांकल माता के दर्शन करते हैं। मंदिर में रुकने के लिए अलग-अलग व्यवस्था है।

पैदल भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
ट्रस्ट अध्यक्ष कैप्टन सगतसिंह के मुताबिक भाद्रपद का मेला लगातार दूसरी बार स्थगित किया गया है। यह मेला दस दिन तक चलता है। तेरस और चौदस को बहुत ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालु पैदल भी आते हैं।

दुकानदारों को करोड़ों का घाटा
मंदिर के बाहर करीब 40-50 दुकानदार है। इनका व्यापार भी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से चलता है। मंदिर के बाहर व्यापारियों को यह मेला स्थगित होने पर करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए का घाटा होगा।

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