इलाज के लिए मदद की जरूरत:10 साल पहले पत्नी की किडनियां फेल, अब खुद को मुंह का कैंसर

बाड़मेर2 महीने पहले
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कैंसर पीड़ित कांस्टेबल जुंझाराम। - Dainik Bhaskar
कैंसर पीड़ित कांस्टेबल जुंझाराम।

कांस्टेबल जाखड़ व उनकी पत्नी के इलाज के लिए जमीन और जेवर बिके, अब दुबारा बीमारी ने जकड़ा,
​​​​​​​सनावड़ा गांव निवासी एक पुलिस जवान पर पिछले 10 सालों से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वो जिंदगी जीने के लिए जंग लड़ रहा है, लेकिन बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही है। एक बीमारी से लड़ कर जीतता है तो दूसरी बीमारी पीछे लग जाती है। 10 साल पहले पत्नी की दोनों किडनी फेल हो गई, इसके बाद खुद को कैंसर, फिर पिता को खोया, अब जिंदगी पटरी पर लौटी ही थी कि फिर से मुंह के कैंसर ने चपेट में ले लिया। यह कहानी सनावड़ा गांव निवासी जूझाराम पुत्र वीराराम जाखड़ की है, जो यातायात पुलिस में कांस्टेबल है।

पिछले 10 साल से जिंदा रहने के लिए जिंदगी से जंग लड़ रहा है। हाल ये हैं कि पत्नी के जेवरात से लेकर जमीन-जायदाद तक बेच दिया है। अब उसके पास इलाज के लिए रुपए नहीं है। 10 सालों में करीब 50-60 लाख रुपए इलाज में लग चुके हैं। अब भी पत्नी के लिए हर माह 6-7 हजार की दवाई चल रही है।

पत्नी भी माता-पिता की इकलौती बेटी, इसलिए मां ने किडनी देकर जान बचाई
जूंझाराम की जिंदगी में मुसीबतों की शुरूआत 2012 से हुई। जब पत्नी पेमी देवी की दोनों किडनी खराब हो गई। दो साल तक डायलिसिस करवाया। इससे करीब 6-7 लाख रुपए खर्च हो गए। इसके बाद जान बचाने के लिए जब कोई आगे नहीं आया तो पेमी देवी की मां लेहरो देवी ने किडनी देने के लिए हां भरी। दरअसल लेहरो देवी के इकलौती संतान पेमी देवी ही है, ऐसे में खुद को खतरे में डाल बेटी की जान बचाने के लिए किडनी दे दी। जूझाराम बीमारी से हार चुका था, किडनी ट्रांसप्लांट करने लिए जमीन बेच कर 30 लाख रुपए जुटाए। इसके बाद पेमी देवी को किडनी ट्रांसप्लांट की गई।

2 साल में दूसरी बार कैंसर, अहमदाबाद में है भर्ती
जूंझाराम को वर्ष 2020 में मुंह का कैसर हो गया। पहले से आर्थिक रूप से टूट चुका था, ऐसे में एक बार फिर खुद की जान बचाने के लिए 6 बीघा जमीन को बेचा। इससे करीब 15-20 लाख रुपए जुटा कर कैंसर का इलाज करवाया। 6 महीने तक इलाज के बाद मुंह के कैंसर से ठीक हुआ। इसके बाद पिछले एक साल से ड्यूटी पर लौट आया था, ऐसे लगा मानो जिंदगी पटरी पर लौट रही है, लेकिन इस बीच जुलाई 2022 में पिता वीराराम दुनिया का अलविदा कह कर चले गए। इसके बाद भी खुद ने हिम्मत जुटाई, चौहटन चौराहे पर ट्रेफिक पुलिस जवानों के साथ ड्यूटी करता रहा। अभी कुछ दिन पूर्व ही अचानक उसे फिर से कैंसर ने चपेट में ले लिया। अब मुंह का कैंसर है और अहमदाबाद के आनंद केयर कैंसर सेंटर में जिंदगी व मौत से जूझ रहा है। सर्जरी एक माह बाद होगी। अब पूरी तरह से टूट चुका जवान जिंदगी बचाने के लिए आमजन से अपील कर रहा है।

पुलिस ने 3.5 लाख की मदद जुटाई, पर 25 लाख चाहिए
यातायात पुलिस के जवान जूझाराम की मदद के लिए बाड़मेर जिले के कुछ जवानों मुहीम चलाई और पिछले 5-7 दिन में करीब 3.5 लाख रुपए जुटाए है। पुलिस के जवान 500 रुपए से लेकर 5 हजार रुपए तक मदद कर रहे है। इस तरह की आफत में पुलिस के जवान मददगार बने है। बाड़मेर एसपी दीपक भार्गव ने कहा कि जूझाराम हमारे परिवार का हिस्सा है, इसके लिए जो भी पुलिस मदद कर सकेगी, उसके लिए प्रयास करेंगे। दैनिक भास्कर आमजन से भी अपील करता है कि आर्थिक रूप से टूट चुके जवान जूझाराम की मदद के लिए आगे आए।

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