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बदमाशों का दुस्साहस:स्थानीय पुलिस के बिना एटीएस ने तस्कर चंदू को पकड़ा, हथियारबंद 20-25 बदमाशों ने टीम पर हमला बोल भगाया

बाड़मेर2 दिन पहले
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बाड़मेर. शराब तस्कर चंदू उर्फ चंद्र प्रकाश के फरार होने के बाद हाइवे पर नाकाबंदी करती पुलिस।
  • कानपुर में शराब तस्करी के मामले में था वांटेड, शिव पंचायत समिति से पकड़ ला रहे थे बाड़मेर

यूपी के कानपुर में शराब तस्करी के दर्ज मामले में कानपुर पुलिस और एटीएस जयपुर की टीम तस्कर चंद्र प्रकाश जाणी को पकड़ने के लिए बाड़मेर आई थी। बाड़मेर की स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगने्र दी और बदमाश चंद्र प्रकाश को शिव पंचायत समिति के बाहर से दबोच लिया। इसके एटीएस व कानपुर पुलिस के महज तीन पुलिसकर्मी एक गाड़ी में हिस्ट्रीशीटर व इनामी बदमाश को बिठा कर बाड़मेर की तरफ लेकर आ रहे थे।

बाड़मेर शहर से महज 10 किमी. पहले पीछे से आई चार गाड़ियों में सवार बदमाशों ने सिविल वर्दीधारी एटीएस व कानपुर पुलिसकर्मियों की टीम के आगे गाड़ी दी और हमला कर बदमाशों ने चंद्र प्रकाश को एटीएस के कब्जे से छुड़ा लिया और गाड़ियों में सवार होकर मौके से फरार हो गए। जोधपुर रेंज आईजी के निर्देश पर जोधपुर रेंज के सभी 6 थानों में हथियारबंद नाकाबंदी करवाई। बाड़मेर एसपी आनंद शर्मा ने बताया कि उत्तरप्रदेश के कानपुर में एक्साइज एक्ट के मामले में फरार चल रहे आरोपी चंदू उर्फ चंद्र प्रकाश पुत्र प्रहलादराम निवासी मौखाब को एटीएस टीम जयपुर

व कानपुर पुलिस पकड़ने के लिए बुधवार को बाड़मेर पहुंची थी। मुखबीर से सूचना पर उसे शिव पंचायत समिति से एटीएस के इंस्पेक्टर महेंद्र कुमार ने उसे पकड़ लिया। एटीएस व कानपुर पुलिस जैसे ही चंद्र प्रकाश को गाड़ी में बिठाकर बाड़मेर के लिए रवाना हुई, तभी ही 4-5 गाड़ियों में समर्थक वहां से पीछे लग गए। बाड़मेर शहर से महज 10 किमी. पहले जालीपा सरहद में ग्रामीण थाने से दो किमी. पहले पीछे से आई दो स्कार्पियो व दो फॉरच्यूनर गाड़ियों में सवार 20-25 लोगों ने एटीएस की गाड़ी को रुकवा दिया। इसके बाद हमला कर डरा-धमकाते हुए आरोपी सीपी को छुड़ाया और गाड़ियों में डाल कर भाग गए।

शिव प्रधान का चचेरा भाई है हिस्ट्रीशीटर चंदू, फरार होने के बाद 6 जिलों में हथियारबंद नाकाबंदी

मौखाब निवासी चंद्र प्रकाश शिव प्रधान बनाने में अहम भूमिका को लेकर इन दिनों काफी चर्चित और सुर्खियों में थे। शिव से चचेरे भाई महेंद्र जाणी को प्रधान बनाया था। इनके पिता प्रहलादराम

भी तीन माह पहले मौखाब के सरपंच चुने गए है। पिता के सरपंच बनने के बाद ही चंद्र प्रकाश राजनैतिक सुर्खियों में आए थे। इसके बाद अब अचानक एटीएस की कार्रवाई हुई है।

एटीएस जयपुर के इंंस्पेक्टर महेंद्र कुमार के साथ ग्रामीण थाने में पुलिस अधिकारियों ने घटनाक्रम को लेकर जानकारी ली। इसके बाद टीमें गठित कर आरोपी तस्कर की तलाश शुरू की। बाड़मेर जिलेभर में हथियारबंद नाकाबंदी की गई। देर रात तक तस्कर चंदू का कोई सुराग नहीं लगा।

^कानपुर के एक्साइज एक्ट के मामले में कानपुर पुलिस व एटीएस जयपुर की टीम हिस्ट्रीशीटर चंद्र प्रकाश को पकड़ने के लिए बाड़मेर आई थी। इस कार्रवाई की लोकल पुलिस को कोई सूचना नहीं थी। पंचायत समिति शिव से आरोपी को दबोचा और लेकर बाड़मेर की तरफ निकल गए। तभी वहां खड़े समर्थक पीछे लग गए। इसके बाद ग्रामीण थाना क्षेत्र के जालीपा सरहद में हमला कर चंद्र प्रकाश को छुड़ा लिया। हमने जोधपुर रेंज में हथियारबंद नाकाबंदी करवाई है औैर बदमाश हिस्ट्रीशीटर की तलाश की जा रही है।
-आनंद शर्मा, एसपी बाड़मेर।

लापरवाही: स्थानीय पुलिस को सूचना नहीं, सिर्फ 3 लोग इनामी तस्कर को पकड़ने गए

सवाल ये है कि हिस्ट्रीशीटर व इनामी तस्कर को पकड़ने के लिए कानपुर जिले के दो पुलिसकर्मी और एक एटीएस का अधिकारी ही पकड़ने गए थे। इसकी भनक बाड़मेर पुलिस को नहीं लगी। सीधे पंचायत समिति शिव पहुंचे और वहां से चंद्र प्रकाश को दबोच लिया। इसके बाद गाड़ी में डाल बाड़मेर की तरफ निकल गए।

अनदेखी: गाड़ियां पीछे लगी थी, शिव थाने में नहीं घुसे, 40 किमी. पीछा कर हमला किया

शिव पंचायत समिति से चंद्र प्रकाश को दबोचने के बाद से ही वहां खड़े समर्थकों की 4-5 गाडिय़ां एटीएस टीम के पीछे लग गई थी। पास ही शिव पुलिस थाना था, लेकिन एटीएस टीम थाने में नहीं घुसी। गाड़ी को बाड़मेर की तरफ दौड़ाती रही। पुलिस को कोई सूचना तक नहीं दी। 40 किमी. तक गाड़ी को लेकर बाड़मेर शहर के नजदीक पहुंच गए। ग्रामीण थाना क्षेत्र के हरसाणी फांटे के पास पीछे से आई गाड़ियों में सवार बदमाशों ने हमला कर चंद्र प्रकाश को छुड़ा लिया।

संदेह: क्या एटीएस को भी बाड़मेर पुलिस पर भरोसा नहीं, सूचना तक देना उचित नहीं समझा

कानपुर पुलिस एटीएस जयपुर को लेकर बाड़मेर पहुंची थी और बाड़मेर पुलिस को सूचना तक नहीं दी। सवाल ये है कि क्या बाड़मेर पुलिस की हिस्ट्रीशीटर से सांठगांठ थी या पुलिस पर भरोसा नहीं है। पकड़ने के बाद भी बाड़मेर पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई। शिव थाने से आगे से निकले लेकिन बदमाशों के डर के बावजूद थाने में नहीं घुसे। ऐसे में कई सवाल है जो जवाब मांग रहे है। बिना फायरिंग, मारपीट के आरोपी को आसानी से छुड़ा लिया गया, ये कैसे संभव है। जबकि आरोपी के खिलाफ शराब तस्करी, मादक पदार्थ, एनडीपीएस एक्ट सहित कई धाराओं में राजस्थान, बिहार व यूपी 12 प्रकरण दर्ज है।

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