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भागवत कथा:महिलाओं का समाज में श्रेष्ठ योगदान, मां ही बच्चों को कर सकती है संस्कारित: प्रेम बाईसा

बाड़मेंर10 दिन पहले
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  • कगाऊ गांव में भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़े श्रोता, कौरवों के मंत्री विधु का प्रसंग सुनाया

कगाऊ गांव में भागवत कथा चल रही है। कथा के तीसरे दिन गुरुवार को वीरमनाथ ने कहा कि जिस तरह अमृत कथा को सुनकर महापापी धुंधकारी भी परम धाम प्राप्त हुए है। इसी तरह कथा का श्रवण कर मनुष्य भी अपना लोक सुधार सकते है। कथा वाचक प्रेम बाईसा ने कथा के तीसरे दिन कौरवों के मंत्री विधु और उनकी पत्नी विधुरानी का प्रसंग बताया। विधुरानी भगवान कृष्ण की सच्ची भक्त थी, एक बार उन्होंने भगवान का अभिवादन किया तो उन्हें निहारने में इतनी गमगीन हो गईं कि उन्होंने केले की जगह भगवान को केले के छिलके खिला दिए।

छिलके को भी भगवान बड़े प्रेम से ग्रहण किया। यह देख विधु ने रानी से पूछा कि तूने यह क्या किया, भगवान को छिलके खिला दिए। इस पर भगवान ने प्रसन्न होते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया और अंतरध्यान हो गए। इसके बाद महाराज ने भाव के बस में भगवान है। महाराज परीक्षित के बारे में वर्णन करते हुए बताया कि जब अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग उत्तरा के गर्भ पर किया तो भगवान ने छोटा रूप धारण करके मां के गर्भ की रक्षा की।

उन्होंने नारी धर्म को विशेष बताते हुए कहा कि आज से नहीं सनातन से हमारे यहां नारियों का सम्मान हुआ है, जहां उनको सम्मान मिलता है वहां देवता वास करते हैं। सती चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माताओं को कभी भी बिना बुलाए नहीं जाना चाहिए। सती दक्ष के यज्ञ में बिना निमंत्रण के पहुंची तो अपने प्राणों का परित्याग करना पड़ा। पाश्चात सभ्यता आज हमारे देश में हावी हो रही है, इसका विरोध केवल महिलाएं ही कर सकती हैं। महिलाएं ही आने वाली पीढ़ी को संस्कारित कर सकती है।

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