कार्यशाला:कृषि प्रसंस्करण समय की मांग एवं हमारी जरूरत:रक्षपालसिंह

पोकरणएक महीने पहले
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कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण में न्यूट्री गार्डन पर महिलाओं की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें गोमट, रामदेवरा, सेवली क्षेत्रों से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगीनी, आशा सहायिका एवं ग्रामीण माहिलाओं ने भाग लिया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि कुलपति प्रोफेसर रक्षपालसिंह ने महिलाओं को पोषण की महत्ता एवं संतुलित आहार में स्थानीय स्तर पर कुपोषण में लाभदायक खाद्य सामग्री बाजरे के बिस्कुट, रोटी, खिचड़ी, बाजरे के लडडू, बाजरे की मठरी, राबड़ी व चूरमा बनाने के बारे में प्रोत्साहित किया।

उन्होंने बाजरा की फसल को बढावा देना व बाजरा के प्रसंस्करण व मूल्य संवर्द्धन से नए उत्पाद तैयार कर कुपोषित जनसंख्या तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण और कृषि प्रसंस्करण को समय की मांग एवं देश की जरूरत होने की बात कही। कार्यशाला मे निदेशक प्रसार शिक्षा निदेशालय डॉ. सुभाषचंद्र ने बताया कि संसाधनों की कमी के कारण दुनिया भर के लोग फल व सब्जियों का सेवन अपर्याप्त मात्रा में करते है। जिसके कारण पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।

इसकी महत्ता एवं उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र ने न्यूट्री गार्डन पर सजीव प्रदर्शन इकाई विकसित की है। उन्होंने न्यूट्री गार्डन को घर के पिछवाड़े या खेत के एक छोटे हिस्से में आसानी से उगाया जाने की बात कही। केंद्र के प्रभारी डॉ. बलवीरसिंह ने बताया कि देश के आकांक्षी जिलों में शामिल जैसलमेर जिले में नीति आयोग की ओर से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले बच्चों को शुद्ध एवं पौष्टिक आहार दिए जा रहे है।

उन्होंने न्यूट्री गार्डन का उद्देश्य कीटनाशी रहित सब्जियां को इस प्रकार लगाया जाने का है कि परिवार के सदस्यों की आवश्यकता अनुसार प्रतिदिन कुछ न कुछ सब्जियां प्राप्त होती रहे। शस्य वैज्ञानिक डॉ. के. जी. व्यास ने संतुलित पोषण आहार की उपयोगिता के साथ न्यूट्री गार्डन में समन्वित कीट रोग एवं उर्वरक प्रबंधन के बारे में समझाया। कार्यशाला मे पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. राम निवास ढाका ने बताया कि न्यूट्री गार्डन के लिए कम से कम 6 घंटे सीधी धूप वाले स्थान चयन एवं न्यूट्री गार्डन रसोई घर के आसपास होनी चाहिए।

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