बहादूर साहेब ने कहा:सत्संग सुनने से मन निर्मल व व्यवहार में आती है उदारता

पोकरण13 दिन पहले
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गरीब साहेब की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
गरीब साहेब की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु।

अनंत बाबा गरीब साहेब की 101 वीं पुण्य तिथि के अवसर पर शुक्रवार को शहर के वार्ड नं तीन स्थित गरीब साहेब के ठिकाने में दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमे क्षेत्र की धर्मप्रेमी जनता उपस्थित रही। शुक्रवार को सत्संग समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें कबीरपंथी संतों ने भजनों की सरिता बहाई। जिस पर उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर होकर नाचने लगे।

आयोजन संचालकों ने बताया कि अनंत बाबा गरीब साहेब की 101वीं पुण्य तिथि के अवसर पर दो दिवसीय सत्संग समारोह का आयोजन स्थानीय गरीब साहेब के ठिकाने पर किया गया। शुक्रवार को बीजक पाठ, दोपहर में भजन, सत्संग व रात्रि को प्रवचन कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर पार्षद आईदान माली, नेमीचंद सोलंकी, धूड़ाराम, दमाराम, राणाराम, रतनलाल, भगाराम, दूलीचंद, दीपक, भोमराज, शिवा गहलोत, टीकमचंद, जितेंद्र सोलंकी,गणेश सहित कई लोग उपस्थित रहे।

प्रवचन देते हुए बहादुर साहेब कहा कि सत्संग सुनने से व्यक्ति का मन निर्मल होता हैं। कभी भी मन में बुरे विचार नहीं आते हैं। प्रत्येक मनुष्य को भगवान का स्मरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भक्त द्वारा स्मरण करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। जब जीव अपना कदम सत्संग की तरफ बढ़ता हैं तो एक-एक कदम पर अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता हैं। अपने जीवन को पवित्र बनाए रखने का साधन एक मात्र सत्संग हैं।

सत्संग मनुष्य को जीने की कला सिखाती हैं। बिना किसी लोभ के दीन-हीन व्यक्तियों की सेवा करें। लालच का त्याग करते हुए साधु संत एवं गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने पर मनुष्य का लोक एवं परलोक दोनों संवर जाता हैं। गुरु प्राणी को परमात्मा से मिलाने का हैं सेतु- उन्होंने ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को संसार से अलग होने पर ही संसार का ज्ञान होता हैं।

वास्तव में हम संसार से अलग और परमात्मा से एक हैं। हम परमात्मा की भक्ति कर जीवन की सार्थकता सिद्ध कर सकते हैं। ईश्वर की भक्ति से सुख मिलता हैं। जिस मनुष्य ने अपने शरीर, मन, बुद्धि व इंद्रियों को वश में कर लिया हैं। अपने सम्पूर्ण संशय मिटा लेता हैं। तथा सभी दोष समाप्त कर लेता हैं तो उसे ब्रहृा प्राप्त हो जाता हैं। गुरु प्राणी को परमात्मा से मिलाने का सेतु हैं।

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