वैज्ञानिक कृषक संवाद:डॉ. ढाका ने कहा जलवायु सहिष्णु कृषि तकनीकों व पद्धतियों को अपनाकर किसान करें खेती

पोकरण2 महीने पहले
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कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण के प्रशिक्षण सभागार मे जलवायु सहिष्णु कृषि तकनीकों एवं पद्धतियों के व्यापक अभियान का सीधा प्रसारण एवं वैज्ञानिक कृषक संवाद का आयोजन किया गया। जिसमे गोमट, बडली मांडा, पोकरण के 52 किसानों एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सजीव प्रसारण के माध्यम से देश भर के सभी कृषि वैज्ञानिकों से आजादी के 75 वें अमृत महोत्सव पर अपने क्षेत्र के नजदीक कम से कम 75 किसानो, गावों, उपक्रमों को गोद लेकर सफल उधमी बनाने की अपील की। उन्होंने देश को कुपोषण से बचाने के लिए बदलते जलवायु मे वैज्ञानिक एवं उन्नत तरीको से खेती करने पर ज़ोर दिया। प्रसारण के दौरान उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन को ध्यान मे रखते हुये ही संयुक्त राष्ट्र महासंघ ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के तौर पर मनाने की घोषणा की है। इस अभियान का प्रसारण देश भर के विभिन्न कृषि केन्द्रों व संस्थानों पर एक साथ किया गया।

केंद्र के सस्य विज्ञान के विषय विशेषज्ञ डॉ. के. जी. व्यास ने स्लाइड प्रस्तुतीकरण के माध्यम से क्षेत्र अनुकूल फसलें जैसे बाजरा, मूंग, ग्वार, तिल, चना, सरसों, तारामीरा, ईसबगोल, जीरा की उन्नत एवं जलवायु सहिष्णु किस्मों एवं प्रबंधन पर चर्चा की। उन्होंने मूंग की आइपीएम-2,3 एवं बाजरा की जी एचबी 905, बी एच बी 1202 एवं सरसों की जीडीएम-4, 5, एन आरसीडीआर-2 एवं चना की त्रिवेणि, मरुधर, तीज, गणगौर और जीरा की जी सी -3, 4 उन्नत एवं जलवायु सहिष्णु किस्मों की बात कही। प्रसार विषय विशेषज्ञ सुनील शर्मा ने जलवायु अनुकूल केर, खेजड़ी, खजूर, नींबू, अनार, कुमट, गूगल लगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। कृषक वैज्ञानिक संवाद मे पशुपालन के विषय विशेषज्ञ डॉ. राम निवास ढाका ने जलवायु परिवर्तन के अनुसार पशुपालन के वैज्ञानिक तरीको को अपनानने पर जोर देते हुए किसानों को सूखे चारे को यूरिया से उपचारित एवं हरे चारे का अचार साइलेज को सुरक्षित रखकर सर्दियों में पशुओं के लिए उपयोग करने के साथ सालभर खिलाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बकरियों के लिए पुरानी पद्धतियों से बने हुए आवास को आधुनिक बनाकर इनमे लगने वाली बीमारियों को कम करने के साथ साथ वजन बढ़वार की बात कही। केंद्र के मृदा विशेषज्ञ डॉ. बबलू शर्मा ने फसलों मे लीफ़ कलर चार्ट के अनुसार पोषण प्रबंधन करने पर ज़ोर दिया। मृदा मे आवश्यकता अनुरूप उर्वरकों का उपयोग हो सके । कार्यक्रम मे कृषक रहमतुल्ला, ईस्लाम, छगन लाल, कैलाश चंद्र, रूगलाल, केशु, असमा, दरिया, जुवेदा इत्यादि मौजूद रहे है।

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