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ग्रामीणों ने अपने निजी खर्चे से मार्ग को कराया ठीक:सरकार के पास नहीं है डामरीकरण के लिए बजट, आजादी के बाद से ही नहीं बनी सड़क

पोकरण20 दिन पहले
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अगर मन में जोश, जुनून और जज्बा हो तो असंभव कार्य को भी आसानी से पूर्ण किया जा सकता हैं। कुछ ऐसा ही कार्य किया हैं जैसलमेर जिले की सत्याया पंचायत के सेवडा गांव के युवाओं ने कार्य कर दिखाया। पंचायत समिति नाचना की ग्राम पंचायत सत्याया के राजस्व गांव सेवडा में मुख्य मूलभूत सुविधा सड़क की समस्या जो आज़ादी के सात दशक बाद भी वैसी की वैसी बनी हैं। लेकिन ग्रामीण अब भी सड़क से वंचित हैं। सेवडा गांव में एक तो ग्रेवल सड़क और ऊपर से आंधियों की ऋतु होने के कारण हर बार मार्ग अवरुद्ध हो जाता हैं। अससे वाहन चालकों को मुसीबतों से सामना करना पड़ता हैं। वाहन वही फंस जाते हैं तथा कई बार वाहन क्षतिग्रस्त भी हो जाते हैं। सेवडा गांव में डामर सड़क की मांग को कई बार उठाया गया लेकिन अभी भी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है।

सेवडा गांव के युवाओं द्वारा कल सामूहिक श्रमदान का निर्णय लेते हुए जहां भी वाहन फंसने की ज्यादा शिकायत थी वहां युवाओं द्वारा ट्रैक्टर की मदद से रेत के टीलों को हटाया गया तथा ग्रेवल सड़क को जाम से निजात दिलाई। जहां-जहां ज्यादा खड्डे और ज्यादा रेत थी। वहां रेत को हटाकर वहा खींप, सीणिया, बुवाड़ी, लोणा आदि डालकर मार्ग को सही किया। मदद करने में मुख्य रूप में नाथूसिंह, माधुसिंह, जोगेन्द्रसिंह, गुलाबसिंह, धनसिंह, यशपालसिंह, चैनाराम और निःशुल्क ट्रैक्टर उपलब्ध कराने वाहन मालिक रेवन्तसिंह का विशेष सहयोग रहा। गांव के वृद्ध जनो ने युवाओं के इस कार्य को सराहा। ग्रामीणों के लिए यह समस्या दोधारी तलवार के समान हैं। एक तो ग्रेवल सड़क और ऊपर से रेत का जमाव हो जाने से दुगुना व्यय करना पड़ता हैं। सेवडा गांव में के लोकगों लोगों को आज भी सड़क का इंतजार है। इसके लिए वे बराबर गुहार करते हैं, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

डामर सड़क की मांग को हर बार किया अनसुना

देश की आजादी के बाद से सेवडा में डामर सड़क की मांग उठती आई है। कई बार अधिकारियाें, नेताओं और संपर्क पोर्टल पर समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार मांग को अनसुना कर दिया गया और ज्ञापन पत्र को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस सड़क का आलम यह है की 15 वर्ष पूर्व एक सरपंच के कार्यकाल के दौरान इस रेतीले मार्ग पर नरेगा योजना से इस मार्ग पर मुरड डालकर इसको ग्रेवल सड़क में बदला गया था। उसके बाद से आज तक इस सड़क पर एक रुपए का काम नहीं हुआ हैं। अब इस मार्ग पर केवल गडढे और रेत के टीले जरूर दिखाई देते हैं।

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