जागरूकता:मूंग की बुवाई के एक माह बाद खरपतवार हटाएं; कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिकों ने छायण गांव में मूंग के खेतों में दी जानकारी

पोकरण3 महीने पहले
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बारिश के मौसम मे फसलों पर रोग एवं कीटों का प्रकोप लगने की संभावना अधिक रहती है। इससे फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। क्षेत्र के बहुत सारे किसान मूंग की खेती करते हैं तथा यह क्षेत्र की प्रमुख दलहनी फसल होने की वजह से इसकी बुवाई बड़े पैमाने पर की जाती है और किसानों को इससे लाभ भी अच्छा मिलता है, लेकिन कई बार फसल संबंधी समस्याओं एवं जानकारी के अभाव में वे इससे पूरा लाभ नहीं उठा पाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र, पोकरण के कृषि वैज्ञानिकों ने छायण गांव में मूंग के खेतों का भ्रमण किया।

कृषि वैज्ञानिकों ने फसलों मे रोग एवं कीड़ों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय से इनका नियंत्रण करने की आवश्यकता बताई। मूंग की बुवाई के लगभग 25-30 दिन तक किसान को खरपतवार पर खास ध्यान देना चाहिए, क्योंकि शुरुआती दौर में खरपतवार फसल को सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा कर नुकसान पहुंचाते हैं। डॉ. के. जी. व्यास ने कृषकों को बताया कि मूंग की फसल में रसचूसक कीटों, मोयला, सफेद मक्खी और हरा तेला के अतिरिक्त पीला मोजेक, पत्ती धब्बा, उखटा, चूर्णी फफूंद, पर्ण संकुचन प्रमुख रोग है जो मूंग की पैदावार को कम करते हैं।

किसान फूल अवस्था पर खेत का निरीक्षण करते रहें और फसल सुरक्षा के लिए डायमिथोएट 2 मिली को प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 1 मि.ली. को प्रति 3 लीटर पानी या थायोमेथोक्जाम 25 डब्ल्यू.जी. 1 मि.ली. को प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोलकर छिड़काव करने करें। केन्द्र के प्रसार वैज्ञानिक सुनील शर्मा ने मूंग मे लगने वाले रोगों से फसल को बचाने के लिए कवक नाशी से बीज उपचार करके नियंत्रित करने की आवश्यकता बताई। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. रामनिवास ढाका ने मूंग की खेती में खरपतवार प्रबंधन के लिए गर्मियों में अपने खेत की गहरी जुताई करने की सलाह दी।

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