पानी का संकट:15 हजार की आबादी वाले रामदेवरा कस्बे में 7 जीएलआर व 1 एसआर

रामदेवरा2 महीने पहलेलेखक: गोपालसिंह तंवर
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कस्बे के आस-पास के क्षेत्राें में पानी के अभाव में सूखी जीएलआर। - Dainik Bhaskar
कस्बे के आस-पास के क्षेत्राें में पानी के अभाव में सूखी जीएलआर।
  • नहाने के लिए मीठा और पीने के लिए खारा पानी, जलदाय विभाग की योजना को मंजूरी का इंतजार

लोक देवता बाबा रामदेव की तीर्थ स्थली और राजस्थान की सबसे धनी पंचायतों में सुमार रामदेवरा ग्राम पंचायत में विकास और जन सुविधाओं के नाम पर सरकार, जनप्रतिनिधिओं एवं प्रशासन के उच्चाधिकारियों के द्वारा वादे और आश्वासन को हर वर्ष किए जाते हैं। लेकिन हकीकत का सुविधाओं के नाम से कोई लेना देना नहीं है। रामदेवरा गांव और ढाणियों की आबादी करीब 15 हजार है, लेकिन इस बड़ी आबादी के लिए पेयजल व्यवस्था के नाम पर मात्र 7 जीएलआर और एक एसआर है। कस्बे में इस आबादी के अलावा वर्षभर में लाखों श्रद्धालु रामदेवरा बाबा रामदेव की समाधि के दर्शनों के लिए आते हैं।

जिनकी पेयजल व्यवस्था के नाम पर मात्र भादवा महीने में ही पेयजल व्यवस्था की जाती है। रामदेवरा ग्राम पंचायत को करीब तीन वर्ष पूर्व जोधपुर सांसद के द्वारा प्रधानमंत्री सांसद आर्दश ग्राम योजना के तहत गोद भी लिया गया था लेकिन इस योजना के नाम पर मात्र कुछ कार्य करवा कर इतिश्री कर दी। रामदेवरा गांव में यहां के स्थानीय लोगों के साथ बड़ी मात्रा में बाहरी लोग भी व्यवसाय के कारण रामदेवरा में अपनी आजीविका चलाते हैं और रामदेवरा की एक बड़ी जन संख्या कस्बे के आस पास में ढाणियों में रहती है।

रामदेवरा ग्राम पंचायत की कुण्डलियों की ढाणी, सोहनसिंह की ढाणी, नखतसिंह की ढाणी, बिड़दसिंह की ढाणी और भीखे खान की ढाणी में जीएलआर बनी हुई है। इन सब ढाणियों के अलावा बहुत बड़ी संख्या में ढाणियों के निवासियों के पास ना तो पानी की पाइप लाइन की व्यवस्था है, ना जीएलआर की सुविधा। रामदेवरा ग्राम पंचायत सांसद आर्दश ग्राम पंचायत के तहत गोद ली गई। ग्राम पंचायतों में शामिल होने के बाद भी क्षेत्र के बाशिंदे अभी भी पानी काे परेशान हैं।

जलाशयों का पानी टैंकरों से भरकर धर्मशालाओं में सप्लाई

रामदेवरा में लोक देवता बाबा रामदेव की आस्था के केन्द्र रामसरोवर तालाब पोकरण फलसुण्ड पेयजल योजना से जोड़े वर्ष भर से ज्यादा हो गया। लेकिन रामदेवरा के नागरिकों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पीने के लिए मीठे पानी की कोई योजना नहीं बनाई गई। रामसरोवर तालाब में वर्षभर में लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं लेकिन रामसरोवर तालाब के साथ श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी की योजना पर कोई कार्ययोजना नहीं है। श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के लिए पीने के लिए मीठे पानी की कार्ययोजना पर जलदाय विभाग तो कार्य करने को तैयार हैं लेकिन नहरी विभाग के द्वारा योजना को आगे मंजूरी ना देने के कारण इस संबंध में कोई योजना नहीं बन सकी। रामदेवरा में इसके कारण हजारों की जनसंख्या और लाखों श्रद्धालु पीने के लिए मीठे पानी को वर्षों से तरस रहे हैं।

तीन से चार माह में ही खत्म हो जाता है जलाशयों का मीठा पानी

रामदेवरा और आस पास में स्थित ढाणियों के निवासियों के लिए पीने के मीठे पानी का साधन जलाशयों का पानी भी रामदेवरा में स्थित धर्मशालाओं और संस्थाओं के द्वारा बडी कीमत देकर खरीद लिया जाता है। रामदेवरा के आस पास स्थित जलाशयों का पानी 3 से 4 माह में ही खत्म हो जाता है। रामदेवरा में सरकार की जलस्वालम्बन योजना के अर्तंगत जलाशयों में पानी के संग्रहण के लिए कोई योजना लागू नहीं होती है। जिसके कारण रामदेवरा के स्थानीय निवासियों को पीने के लिए खारा पानी ही उपयोग में लेना पड़ता है। जलाशयों में जल के खत्म होने का सबसे बड़ा कारण पानी के टैंकरों से पानी को रामदेवरा में स्थित संस्थाओं को बेचा जाता है। रामदेवरा में 300 से अधिक संस्थाएं और धर्मशालाएं है। इन संस्थाओं को जलाशयों का पानी बेचा जाता है।

नहरी पेयजल योजना से जोड़ने पर 563 गांवों को मिलेगा मीठा पानी

जानकारी के अनुसार पोकरण-फलसूंड पेयजल परियोजना वर्ष 2005 में राज्य में भाजपा की तत्कालीन वसुंधरा सरकार की ओर से मंजूर की गई थी। परियोजना के अंतर्गत नाचना से नहरी पानी पोकरण-फलसूंड होते हुए बालोतरा सिवाना तक पहुंचाना प्रस्तावित है। इस परियोजना के तहत कुल 563 गांव लाभांवित होंगे। इसमें बाड़मेर जिले के 386 जैसलमेर जिले के 177 गांव। 2009 में इस योजना पर काम शुरू हुआ, जो अभी तक जारी है। गतवर्ष अगस्त माह में रामदेवरा में रामसरोवर तालाब को नहरी पानी से जोडने की योजना के उद्धघाटन के दौरान जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी ने पोकरण-फलसुण्ड-सिवाना नहरी पेयजल योजना से जैसलमेर के गावों को मीठे पानी से जोडने का वादा किया था। लेकिन अभी दस योजना की गति को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में ग्रामीणों के लिए मीठे पानी की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

रामदेवरा और आस पास के ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण पीढियों से खारा पानी ही पीने के लिए उपयोग मे लेते हैं। लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों को आमजन की इस परेशानी से कोई वास्ता नहीं दिख रहा है। - भंवर जयपाल, समाजसेवी रामदेवरा।

रामदेवरा में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के लिए मीठे पानी जैसी सुविधा करने से जहां आमजन को खारे पानी का उपयोग नहीं करना पड़ेगा। वहीं रामदेवरा में बाबा की समाधि के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसका लाभ मिलेगा। - सत्तार खां, ग्रामीण​​​​​​​

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