भामाशाहों के सहयोग से शिक्षकों ने जुटाए एक लाख:शिक्षकों और भामाशाहों ने स्कूल में शिक्षण सामग्री को दीवार पर उकेरा

शिव9 महीने पहले
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शिव. शिक्षकों व भामाशाहों के सहयोग से बदली विद्यालय की तस्वीर। - Dainik Bhaskar
शिव. शिक्षकों व भामाशाहों के सहयोग से बदली विद्यालय की तस्वीर।
  • बच्चों के लिए फर्नीचर, कमराें के काेने-काेने में शिक्षण संबंधी सामग्री की पेंटिंग

शिक्षक वही जाे विद्यालय काे मंदिर की तरह माने और उसकी देखरेख के साथ प्रत्येक आवश्यक वस्तु जाे, विद्यार्थियोंं के सीखने में काम आए, उसे जुटाने का हर संभव प्रयास करें। स्कूल में विद्यार्थियोंं के लिए शुद्ध वातावरण के साथ आधुनिक शिक्षण सामग्री काे जुटाने के प्रयासाें के तहत शिक्षकाें की यह पहल शिव ब्लाॅक के चाेचरा ग्राम पंचायत की राप्रावि कल्याणपुरा में की गई है।

शिक्षकों व भामाशाहों ने विद्यालय की सूरत ही बदल डाली है। विद्यालय में सभी बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर हो या विभिन्न चित्रों और खिलौनों के माध्यम से बच्चों को शिक्षण, यहां करवाया जा रहा है। विद्यालय की प्रत्येक दीवार तथा कोने में शिक्षण सिद्धांतों पर आधारित चित्र बनाए गए है ताकि छात्र इन्हें देखकर सीखो या करके सीखो के आधार पर सीख सकें। प्रत्येक दीवार काे रंगीन चित्र उकेरे गए है। सीबीईओ द्वारका प्रसाद शर्मा ने बताया कि विद्यालय के शिक्षक वीरमा राम व राकेश कुमावत ने विद्यालय नवाचार की कड़ी में एक और विद्यालय काे जोड़ा है, जाे बहुत ही सराहनीय कार्य है।

शिक्षक ट्रेनिंग में 1 साल पहले सीबीईओ शर्मा से हुए थे प्रेरित
अध्यापक वीरमा राम व राकेश कुमावत बताते हैं कि एक साल पहले शिक्षक ट्रेनिंग में वे शिव गए थे, वहां पर सीबीईओ द्वारका प्रसाद शर्मा ने एक प्रेरणादायक कहानी सुनाई और कहा कि शिक्षक चाहें तो विद्यालय की सूरत ही बदल सकता है। उनसे प्रेरित होकर हमने विद्यालय में 21 पौधे लगाए और पानी का अभाव होने पर भी टैंकर डलवा कर पौधों को विकसित किया। अब विद्यालय में चारों तरफ हरियाली है, फूलों की महक पूरी परिसर में रहती है।

बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था
पीईईओ दीपक वर्मा ने बताया कि विद्यालय के शिक्षकों ने स्वयं व भामाशाहों के सहयोग से निजी स्कूलों के तर्ज पर बच्चों के बैठने के लिए आयु के अनुसार फर्नीचर की व्यवस्था की है। इस कार्य से आस-पास के विद्यालय भी प्रेरित हो रहे हैं, और स्कूल में फर्नीचर की व्यवस्था करने के लिए भामाशाह से मिल रहे हैं।

शिक्षण विधियाें से सीखाने पर दिया जा रहा जोर
विद्यालय की दीवाराें पर बने शिक्षाप्रद स्लाेगन, विभिन्न गणित की आकृतियां, हिंदी व अंग्रेजी की प्रेरणादायक कहानियां तथा सांप-सीढ़ी के गेम आदि से छात्राें काे पढ़ाया जा रहा है। शिक्षकाें व भामाशाहाें के सहयाेग से एक लाख रुपए जुटाकर विद्यालय में बदलाव किया गया है।

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