आवंटन:केंद्रीय मंत्री ने जिले को तीन हजार मीट्रिक टन खाद आवंटित की

बयाना2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बयाना. दिल्ली में केंद्रीय उर्वरक मंत्री से मुलाकात करती सांसद रंजीता। - Dainik Bhaskar
बयाना. दिल्ली में केंद्रीय उर्वरक मंत्री से मुलाकात करती सांसद रंजीता।

डीएपी खाद संकट को देखते हुए सांसद रंजीता कोली ने केंद्रीय उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया से दिल्ली में मुलाकात कर किसानों को डीएपी खाद की कमी और कालाबाजारी के बारे में अवगत कराया। इस पर सांसद के आग्रह पर उर्वरक मंत्री ने भरतपुर जिले के लिए लगभग 3000 मीट्रिक टन एनपीके और डीएपी खाद आवंटित की है। इससे जिले के किसानों को काफी राहत मिलेगी।

सांसद कोली ने केंद्रीय उर्वरक मंत्री को बताया कि खाद किल्लत के कारण किसान सरसों की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। जबकि सरसों भरतपुर जिले की प्रमुख नकदी फसल है। जिसके चलते किसान परेशान हो रहे हैं। सांसद ने जिले को खाद उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय उर्वरक मंत्री को पत्र भी सौंपा। जिस पर उर्वरक मंत्री ने भरतपुर जिले के लिए डीएपी खाद की एक रैक आवंटित कर दी। साथ ही सांसद ने खाद की कालाबाजारी को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत बताई। सांसद ने मंत्री को बताया कि कुछ बड़े दुकानदारों और कुछ अधिकारियों द्वारा मिलीभगत करके उर्वरक खाद की कालाबाजारी की जा रही है।

वहीं सांसद रंजीता कोली ने राज्य सरकार पर भी आरोप लगाए और कहा कि केंद्र सरकार तो उर्वरक की पूरी पूर्ति कर रही है। लेकिन राज्य सरकार उसको वितरण करने में पूरी तरह नाकामयाब हो रही है। किसानों तक खाद नहीं पहुंच पा रहा है। उससे पहले ही खाद की कालाबाजारी की जा रही है। इसको देखते हुए राज्य सरकार को अहम कदम उठाना चाहिए और उर्वरक खाद की कालाबाजारी को रोकना चाहिए। अगर कुछ दिन और किसानों को खाद नहीं मिला तो कुछ दिन बाद सरसों बुवाई का समय निकल जाएगा तो किसानों को काफी आर्थिक नुकसान होगा।

जिले में 25 हजार टन डीएपी की जरूरत
इसी विभाग के सहायक निदेशक सुरेश गुप्ता ने बताया कि इस बार जिले में करीब ढाई लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई होनी है। इसके लिए करीब 25 हजार टन डीएपी खाद की किसानों के लिए डिमांड है। अगर सांसद की मांग पर 3 हजार टन डीएपी जिले को मिलता है तो इससे राहत मिलेगी। कृषि विभाग के कर्मचारी गांव गांव जाकर किसानों से के साथ गोष्ठी आयोजित कर डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

खबरें और भी हैं...