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प्रेरक पहल:कर्जदार न बनें परिवार इसलिए 41 निर्धन परिवारों की बच्चियों का कराया विवाह

डीग5 दिन पहले
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विवाह में मदद करती संगठन की महिलाएं।
  • तीन साल पहले दो बेटियों की शादी के लिए मदद की गुहार लगाते देख प्रिय सखी संगठन ने उठाया बीड़ा, मदद की मुहिम में अब बड़ी संख्या में लोग जुट रहे

करीब तीन साल पहले दो बेटियों की शादी के लिए एक मां को आंचल फैलाकर मदद की गुहार लगाते देखा तो एक महिला ने अन्य महिलाओं के साथ संगठन बनाकर निर्धन परिवार की बच्चियों का विवाह कराने का बीड़ा उठाया। इस मुहिम में कोरोना काल के दौरान 11 बच्चियों के विवाह सहित अब तक कुल 41 निर्धन परिवार की बच्चियों का विवाह कराया जा चुका है। हाल यह है कि इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिली है और इस मदद की मुहिम में अब संगठन से जुड़ रहे हैं।

असल में बेटी के हाथ पीले करना हर माता-पिता का सपना होता है। लेकिन बेटी की शादी की चिंता उन्हें बेटी के पैदा होते ही सताने लगती है। ऐसे ही लोगों की जिम्मेदारियों को आज परिवार की तरह प्रिय सखी संगठन की संयोजिका मोनिका जैन एवं उनकी सहयोगी महिलाएं मोहिनी गोयल, ज्योति बंसल, आशा सेठी, गीता कोली, बृजेश ठाकुर, लक्ष्मी खंडेलवाल, ओमवती ठाकुर, शशि जाटव, तुलसी कोली, अंजना कोली आदि बांट रही हैं ।

मेहंदी से लेकर दुल्हन के श्रृंगार के साथ वैवाहिक जीवन से जुडे गृहस्थी के सामान सहित गीत-संगीत की रस्में ये महिलाएं परिवार के सदस्य की तरह निभाती हैं। संगठन की महिलाएं डीग-कामां सहित सेऊ, सुहैरा, बहज आदि कई गांवों में निर्धन परिवार की बेटियों के हाथ पीले करने का काम कर चुकी हैं। जिसमें अब तक संगठन 41 गरीब कन्याओं के हाथ पीले करने में सहयोग कर चुका हैं। इस कोरोनाकाल में उन्होंने 11 गरीब बेटियों की शादी कराई है।

घर-घर जाकर दहेज देने के लिए सामान एकत्रित करती हैं महिलाएं

ये महिलाएं बीते तीन वर्षों से किसी सरकार या एनजीओ पर निर्भर नहीं हैं। बल्कि खुद घर-घर दरवाजे-दरवाजे जाकर जो भी सामान घर में अतिरिक्त हो लेकिन कोरा हो, जैसे कपड़े, बर्तन, गिफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक सामान, राशन, सब्जी आदि गृहस्थी से जुडे सामान के साथ बेटी के विवाह में बतौर कन्यादान सोने-चांदी के आभूषण आदि कीमती चीजें भी भेंट करता है।

शादी के लिए विधवा द्वारा गिरवी रखा खेत वापिस दिलाया
पति की मौत के बाद पुत्रियों के विवाह के लिए बहज निवासी एक विधवा महिला की ओर से अपने खेत को गिरवी रख दिया गया। जब संगठन की संयोजिका मोनिका जैन को पता चला तो पहले 1 जुलाई 2020 को संगठन की महिलाओं ने घर-घर जाकर शादी विवाह के सामान के साथ पैसों का बंदोबस्त कर महिला की मदद कर शादी तो करा दी। लेकिन शादी के दिन ही संगठन ने महिला की ओर से गिरवी रखे गए खेत को छुडाने की ठान ली। संगठन ने महज 12 दिनों में सोशल मीडिया पर मुहिम चलाकर सहायता राशि 30 हजार एकत्रित कर महिला को सौंपने के साथ उसके गिरवी रखे गए खेत को भी छुडा लिया गया।

पॉकेट मनी तथा अपने घर में एकत्रित सामान से शुरुआत की, आज लोग मदद कर रहे : मोनिका

  • 18 दिसंबर 2018 का दिन था। 17 जनवरी को होने जा रही अपनी दो बेटियों की शादी के लिए एक बूढी मां घर-घर जाकर आंचल फैला कर बच्चियों की शादी के लिए मदद मांग रही थी। वह हमारे घर भी आई। उनकी स्थिति को देख मन में कुछ करने की इच्छा जागृत हुई। उस समय मैंने अपनी महिला मित्र शशि गोयल और अंजलि गंधी से इस बारे में चर्चा की और अपनी पॉकेट मनी तथा अपने घरों से ही सामान एकत्रित कर मदद करने की मुहिम छेडी। 21 दिसंबर को इस मुहिम का नाम प्रिय सखी महिला संगठन रखा। मुहिम में कुछ और मित्रों से संपर्क कर साक्षी जैन, अंकिता जैन, मनीषा बजाज, मीनाक्षी शर्मा, ममता गुप्ता, भावना गंधी आदि के सहयोग से कुछ भामाशाहों से संपर्क कर कन्यादान की सामग्री एकत्रित कर 17 जनवरी को दोनाें बेटियों के घर जाकर शादी में मदद की। संगठन की इस मुहिम से प्रेरित होकर इसी शादी में टेंट वाले ने शामियाने के, पानी वाले ने पानी के, हलवाई ने अपने काम के पैसे नहीं लिए जिससे बच्चियों की शादी निर्विघ्नता के साथ बहुत ही अच्छी तरीके से संपन्न हुई। जो कमी संगठन से रह गई वह उस क्षेत्र के लोगों के माध्यम से उनके घर जाकर पूरी कर दी गई। - मोनिका जैन, संयोजिका, प्रिय सखी संगठन

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