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तीसरी लहर से सावधानी:डीग में इस बार भी न मेला भरा और न रंगीन फव्वारे चले, कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर लगाई रोक

डीग19 दिन पहले
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  • मेले में प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से आते थे लोग

कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच डीग मेले पर लगातार दूसरी बार कोरोना का ग्रहण लग गया है। राजशाही परंपराओं का निर्वहन करने वाला सदियों से चला आ रहा डीग का जवाहर प्रदर्शनी एंव ब्रजयात्रा मेला इस बार भी कोरोना की भेंट चढ़ गया।

नगर पालिका अध्यक्ष निरंजन टकसालिया ने भास्कर से बातचीत में कोरोना का हवाला देते डीग मेले के आयोजन पर रोक की बात कही है। अध्यक्ष का कहना है कि कोरोना के कारण मेले के आयोजन को लेकर विचार-विमर्श नहीं कर पाए। अध्यक्ष के इस आदेश से मेले में दुकान लगाने वाले लोगों के साथ क्षेत्र के लोगों में निराशा का भाव है। मेला नहीं लगने से आमजन में भी निराशा है।

इस मेले का आयोजन प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्णा त्रयोदशी से होता है। महाराजा जवाहर सिंह ने इस मेले की शुरूआत कराई थी। जवाहर प्रदर्शनी के नाम से यह मेला विश्व विख्यात है। रंगीन फव्वारों के नाम से मशहूर जवाहर प्रदर्शनी एवं ब्रजयात्रा मेले में 7 दिनों तक चलने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले की शान होते हैं। जिनमें अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन, नौटंकी, बालीवुड नाइट, ढोला गायन, मुकाबला कव्वाली, ब्रजभाषा कवि सम्मेलन आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ बच्चों और युवाओं के लिए कई खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है।

मेले के दौरान विराट कुश्ती दंगल के साथ जलमहलों में रंगीन फव्वारों के प्रदर्शन पर दूर-दराज से लोग मेले में आते है। बडी संख्या में लोगों के लिए ये मेला रोजगार से भी जुडा है।

4 सितंबर से शुरू होना था मेला
श्री जवाहर प्रदर्शनी एवं ब्रजयात्रा मेले का आयोजन 4 सितंबर भाद्रपद की त्रयोदशी से शुरू होना था। 6 सितंबर अमावस्या को जलमहलों में रंगीन फव्वारों के प्रदर्शन के साथ सांय मेले में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन के आयोजन का कार्यक्रम था। विदित रहे कि मेले में आयोजित होने वाले कुश्ती दंगल में दारासिंह जैसे देश के ख्यातिनाम पहलवान डीग मेले में शिरकत कर चुके हैं।

मेला नहीं, लेकिन छुट्टी रही
मेले को वनयात्रा के नाम से भी जाना जाता है। मेले के स्थगित के बाद भी सोमवार को जिला प्रशासन की ओर से वनयात्रा की छुट्टी रखी गई। मेले की अमावस्या के दिन सोमवार को वृंदावन से काठिया बाबा के नेतृत्व में काठिया संप्रदाय की ब्रज चौरासी कोस यात्रा डीग पंहुची। जलमहलों में रंगीन फव्वारे चलाए जाते हैं। कांमा गेट स्थित पीतमदास मंदिर पर बाबा उड़िया के सानिध्य में पूजन समारोह के साथ प्रसादी का आयोजन किया गया।

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