राम-जानकी विवाह महोत्सव:आज जानकी सीता के साथ फेरे लेंगे राम, लक्ष्मन मंदिर में होगा विवाह उत्सव

डीग2 महीने पहले
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शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर परिसर में चल रहे पंच दिवसीय राम-जानकी विवाह महोत्सव के तीसरे दिन पंडित गणेश दत्त पाराशर ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि जब महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ के दरबार में पधार कर कहा कि है राजन कुछ समय के लिए मुझे आप अपने दो पुत्र श्री राम और लक्ष्मण को देकर मुझे व मेरे आश्रम के ऋषि-मुनियों को अनुग्रहित कर दें। राजा दशरथ विश्वामित्र जी की बातों को सुनकर व्याकुल हो गए।

लेकिन, गुरु वशिष्ठ के कहने पर दोनों राजकुमारों को विश्वामित्र के साथ विदा कर देते हैं। वन में राम-लक्ष्मण का ताड़का नामक राक्षसी से सामना होता है। ताड़का के पति का नाम शिंद था। भगवान राम ताड़का का वध करते हैं। पाराशर ने बताया कि ताड़का अविद्या का प्रतीक है और अविद्या अंधकार का। जीवन में कुसंग व भगवान की भक्ति से दूर रहना ही अविद्या है।

विद्या का जीवन में प्रवेश होता है तो विनय आती है विनय से पात्रता, पात्रता से जीवन में धन और धर्म का प्रवेश होता है। जो सुख को प्राप्त कराता है। सुबाहू को मार कर भगवान ने मारीच को दूर फेंक दिया। वहीं भगवान राम ने अहिल्या का उद्धार किया। अहिल्या स्थिरता सहिष्णुता का प्रतीक है। धर्म के 2 लक्षण सहिष्णुता व स्थिरता हैं। जो इनको धारण करते हैं उनका जीवन आनंद में हो जाता है।

राम-लक्ष्मन के जनकपुरी में प्रवेश को देख जनक दोनों राजकुमारों को देखकर चकित हो गए। विश्वामित्र ने सभी का परिचय कराया। इस अवसर पर मंदिर महंत पंडित मुरारी लाल पाराशर, वैद्य नंदकिशोर गंधी, सुंदर सरपंच, लक्ष्मण पंसारी, केदार सौंखिया, प्रहलाद मित्तल, सुरेश गोयल एडवोकेट, योगेश राठौर, गौरी शंकर पाराशर, मुकेश शर्मा आदि भक्त मौजूद रहे। मंदिर परिसर में बुधवार को गौधूली वेला में भगवान का पाणिग्रहण संस्कार कार्यक्रम आयोजित होगा। विवाह समारोह में भगवान की बारात, कन्यादान, फेरे आदि कार्यक्रम आयोजित होंगे।

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