बारिश छोड़ गई बरबादी:पार्वती डैम के 4 गेट खोले, 5740 क्यूसेक पानी छोड़ा, चंबल का भी पुराना पुल फिर से डूबा

धौलपुर3 महीने पहले
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  • 238 पोल गिरे-टूटे, बाढ़ प्रभावित 96 गांवों में से 78 अभी भी अंधेरे में डूबे

सैंपऊ और सरमथुरा उपखंड के क्षेत्रों में फिर से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। झालावाड़ और बारां के बांधों से छोड़ा गया 3.60 लाख क्यूसेक पानी शनिवार को धौलपुर पहुंच गया। इससे चंबल का गैज 140.70 से बढ़कर 141.50 मीटर तक पहुंच गया। चंबल नदी का पानी देर रात को पुराने पुल के ऊपर से एक बार फिर बहने लगा। उन्होंने चंबल नदी का जलस्तर एक बार फिर 143 मीटर तक पहुंचने की आशंका जताई है।

इधर, शनिवार को आंगई स्थित पार्वती डैम के चार गेट खोल कर 5740 क्यूसेक पानी रिलीज किया गया है। इससे रविवार सुबह तक नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। जिला प्रशासन ने लोगों को चौकन्ना कर दिया है। जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता राजकुमार सिंघल ने बताया कि पार्वती डैम का जलस्तर 223.40 को पार कर गया है डेम की कुल क्षमता 223.41 है ऐसे में गेज मेंटेन करने के लिए शाम 6:30 बजे दो गेटों को 2 फीट खोलकर नदी में पानी रिलीज किया गया वही ऊपर से लगातार पानी की आवक होने से डेम का गेज मेंटेन करने के लिए 7:45 पर दो गेट और खोले गए हैं।

दोनों गेटों को 3 फीट खोलकर पानी रिलीज किया जा रहा है। सिंघल ने बताया कि कुल 5740 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। जिसकी सूचना जिला प्रशासन सहित बसेड़ी एवं सैंपऊ उपखंड प्रशासन को दे दी गई है।

पानी के साथ बढ़ने लगी ग्रामीणों की धड़कनें : सैंपऊ-सरमथुरा के कई गांवों में फिर खतरा

डिस्कॉम : 1.60 करोड़ रुपए का नुकसान, 116 ट्रांसफार्मर हुए खराब
चंबल बाढ़ के पांच दिन के बाद 96 गांवों में से 78 गांवों में अब भी अंधेरा पसरा हुआ है। क्योंकि 78 गांवों में अभी भी पानी भरा हुआ है। हालांकि चंबल नदी का जलस्तर पहले के मुकाबले कम हुआ है। लेकिन अभी गांवों के लोग असमंजस की स्थिति में है, क्योंकि चंबल का जलस्तर बढ़ भी रहा है और घट भी रहा है।

ऐसे में 78 गांवों में जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल होने की संभावना कम जताई जा रही है। वहीं उन्हें अब सामान्य जिंदगी जीने के लिए और समय का इंतजार लंबा दिख रहा है। 1996 के बाद इस बार 144.70मी तक पहुंचे जलस्तर ने 96 गांवों में बिजली व्यवस्था को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है।

बाढ़ से इन गांवों में हुए नुकसान से बिजली विभाग को भी 1.60 करोड़ की चपत लग गई है। एसई बीएल वर्मा ने टीमें लगाकर बाढ़ प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति सुचारू करवाने के लिए टीमें भेजी, लेकिन 18 गांवों में ही बिजली आपूर्ति शुरू हो सकी है। जो गांव निचले स्तर से थोड़ा ऊंचाई पर थे और वहां से पानी निकल चुका है। वहीं 78 गांवों में बिजली आपूर्ति सुचारू करने के लिए कर्मी पानी के कम होने का इंतजार कर रहे हैं। पानी कम होने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से इन गांवों में बिजली पोल और ट्रांसफार्मर को बदलकर आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।

गांवों में पानी भरा होने से बिजली ठीक नहीं कर पा रही डिस्कॉम टीम
96 गांवों में 238 पोल खत्म कर दिए हैं। जिसमें कई पोल टूट गए हैं और कई गिर गए हैं। करीब 23 किलोमीटर तक बिजली के तार जल कर खराब हो गए हैं। एसई बीएल वर्मा ने बताया कि गांवों में लगे सिंगल फेज के 73 और 3 फेज के 116 ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं। करीब 1.60 करोड़ रुपए का नुकसान सामने आया है। एसई बीएल वर्मा का कहना है कि गांवों में पानी भरा होने के कारण कर्मी काम नहीं कर पा रहे हैं।

विद्युत शवदाह गृह नहीं होने से सड़क पर ही करने पड़ रहे अंतिम संस्कार

| चंबल मुक्ति धाम में पांच दिन से भरा बाढ़ का पानी अब तक नहीं निकला है। इससे अंतिम संस्कार करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
| चंबल मुक्ति धाम में पांच दिन से भरा बाढ़ का पानी अब तक नहीं निकला है। इससे अंतिम संस्कार करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

श्मशान में 5 दिन से भरा है बाढ़ का पानी

| चंबल मुक्ति धाम में पांच दिन से भरा बाढ़ का पानी अब तक नहीं निकला है। इससे अंतिम संस्कार करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
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