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कोरोना की वजह से दूसरी बार:नहीं भरेगा मचकुंड का माेहर छठ लक्खी मेला, लेकिन पांच दिन पहले ही यूपी और एमपी के श्रद्धालु कर गए मोहरी और कलंगी का विसर्जन

धौलपुर21 दिन पहले
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पूजा करती महिलाएं। - Dainik Bhaskar
पूजा करती महिलाएं।

इस बार देवछठ माेहर छठ लक्खी मेला 11 व 12 सितंबर काे नहीं भरेगा। ऋषि पंचमी 11 सितंबर काे साधु संताें की ओर से स्नान के साथ मेले का आगाज हाेता है, लेकिन इस बार काेराेना के चलते प्रशासन ने देवछठ मेले के स्थगित का निर्णय लिया है और इसके लिए शहर में बडे बडे होर्डिंग्स लगाकर इसकी मुनादी भी कर दी है। एेसे में देवछठ लक्खी मेला स्थगित हाेने की सूचना पर अब लाेग शादी ब्याह की मेहरी कलंगी का विसर्जन के लिए लाेग मचकुंड आ रहे हैं।

इधर, अमावस्या पर साेमवार काे ऐसे ही सुबह घाटाें पर माढा लेपकर पूजा के लिए महिलाओं ने सामूहिक कथा सुनी और परिवारी जनाें के साथ शादी समाराेह की दुल्हा दुल्हन की मेहरी कलंगी का विसजर्न किया।

इस अवसर पर नव विवाहित दुल्हा दुल्हनाें ने भी सराेवर में स्नान करने के बाद परिक्रमा लगाकर मंदिराें में दर्शन किए और प्रसाद आदि चढ़ाकर सुखी जीवन की मन्नत मांगी। अमावस्या पर सुबह से ही लाेगाें की भीड आना जाना शुरु हाे गया। इससे धीरे धीरे सुबह नाै बजे तक मचकुंड में हर घाट पर लाेगाें काे स्नान और मंदिराें में पूजा और परिक्रमा करते देखा गया। महंत कृष्णदास ने बताया कि इस बार देवछठ मेला नहीं लगने की सूचना जैसे जैसे आसपास के शहराें और गांवाें में लोगों को मिल रही है वैसे-वैसे ही लाेग भी देवछठ मेले में राेक काे देखते हुए शादी विवाह की मेहरी कलंगी का विसर्जन के लिए पहुंच रहे हैं। या फिर देवछठ मेले के बाद लाेग आएंगे।

इधर, काेराेना संक्रमण काल काे देखते हुए जिला प्रशासन ने मेला स्थगित कर प्रचार प्रसार भी कराया है। फिर भी पुलिस और जिला प्रशासन के लिए देवछठ मेले में भीड काे राेकना चुनाैती भरा काम हाेगा। क्याेेंकि देशभर के प्रांताें से लाखाें लाेग मचकुंड मेले में पहुंचते हैं। जिसमें पहाड वाले वली के उस और गुरुद्वारा शेर शिकार में मेला भरता है। अब लाेग भी इस 11 व 12 सितंबर काे मेला स्थगित हाेने की सूचना मिलते ही इससे पहले ही मचकुंड पहुंचना शुरु हाे गए हैं। बाकी श्रद्धालु देवछठ के बाद आना मुनासिब समझेंगे।

11 और 12 सितंबर को शुरू होना था मेला, प्रशासन ने लगाई रोक

बता दें कि लगातार दूसरी बार भी काेराेना का काला साया देवछठ मेले पर बना हुआ है। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से देव छठ मेला स्थगित हाेने के बाद श्रद्धालुओ ने करीब दस पंद्रह पहले ही यहां आकर स्नान कर विवाह की मेहरी कलंगी का विसजर्न मचकुंड में कर चले गए थे। क्याेंकि ये परंपरा उन्हें पूरी करनी हाेती है। मान्यता है जिसमें खासकर मध्यप्रदेश के लाेग बडी संख्या में शादी विवाहाें की मेहरी कलंगी का विसजर्न के लिए पहुंचते हैं। इसलिए अन्य दिनाें में ये लाेग परंपरा काे निभाने के लिए पहुंच रहे हैं। यानि की बीच अगस्त माह से ही लाेग मेहरी कलंगी के लिए पहुंचना शुरु हाे गए।

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