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अच्छी खबर:अब धौलपुर में भी 2 महीने बाद टाइगर सफारी का आनंद ले सकेंगे पर्यटक

धौलपुर10 दिन पहले
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सरमथुरा के जंगल में टाइग्रेस टी 117 अपने शावक के साथ कैमरे में हुई ट्रेस। - Dainik Bhaskar
सरमथुरा के जंगल में टाइग्रेस टी 117 अपने शावक के साथ कैमरे में हुई ट्रेस।
  • सरमथुरा रेंज के जंगलों में टाइगरों की मौजूदगी वाला इलाका किया चिन्हित, वहीं तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्ते कर रहे तैयार

पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है। अब धौलपुर में भी टाइगर सफारी कर सकेंगे। यह अगले दो महीने में शुरू हो जाएगी। इसके लिए वन विभाग ने सरमथुरा रेंज के जंगलों में उन जगहों को चिन्हित किया है, जहां अक्सर टाइगर्स की साइटिंग आसानी से हो जाती है। ये क्षेत्र दमोह, खुशालपुर, गिरोनिया और रिछड़ा क्षेत्र में सफारी के लिए रूट तय किए हैं। यहां तक पहुंचने के लिए महानरेगा योजना के तहत श्रमिक लगाकर रास्ते तैयार कराए जाएंंगे।

इसके बाद जल्दी ही जंगल में टाइगर सफारी कराने वाली खुली जीप और अन्य वाहनों को रजिस्ट्रेशन करके अनुमति दे दी जाएगी। अब तक राजस्थान में टाइगर सफारी के लिए लोग सवाई माधोपुर के रणथंभोर अभ्यारण्य में ही जाते रहे हैं। चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन एम.एल. मीणा ने मंगलवार को सरमथुरा रेंज के जगंलों का दौरा किया। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे धौलपुर में टाइगर सफारी शुरू करने के उद्देश्य से सोमवार को ही आए थे।

दो दिन से अधिकारियों से फीडबैक जुटाने के साथ ही वाहन, रास्ते, पर्यटकों और जानवरों की सुरक्षा आदि को लेकर विचार विमर्श कर रहे हैं। यहां का जंगल अच्छा है और लगातार साइटिंग हो रही है। इसलिए यहां टाइगर सफारी शुरू करने की योजना है। उप वन संरक्षक केसी मीणा ने बताया कि धौलपुर के जंगलों में अगले दाे महीने में टाइगर सफारी शुरू करवा दी जाएगी। इससे यहां पर्यटन बढ़ने के साथ ही लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सीमाई इलाकों से जुड़े पर्यटकों को भी काफी सुविधा मिलेगी।

नॉलेज...रणथंभोर से दिसंबर, 2019 में आए थे 2 टाइगर, यहां दो शावकों को जन्म दिया

वन विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक दिसंबर, 2019 में टाइगर सुल्तान कैलादेवी अभ्यारण्य से धौलपुर के जंगलों में आ गया था। हालांकि इसने रणथंभोर उससे भी पहले छोड़ दिया था। बाद में वह बाघिन सुंदरी के साथ कैलादेवी अभयारण्य में रहने लगा था। यहां इन्होंने साल 2018 में दो शावकों को जन्म भी दिया था।

जिनका नाम टाइगर केटी-1 और केटी-2 रखा गया। लेकिन,बाघिन सुंदरी का कैलादेवी में मन नहीं लगा और वह सुल्तान से मिलने के लिए नियमित रूप से धौलपुर आने लगी। बाद में उसने भी यहीं डेरा जमा लिया। बाद में इन्होंने यहां भी शावकों को जन्म दिया। इस तरह अभी धौलपुर रेंज में कुल 5 टाइगर हैं। इनमें दो शावक हैं।

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