धर्म-समाज:मन पर नियंत्रण पा लेने से ही व्यक्ति सफल इंसान बनता है : विनम्र सागर

धाैलपुर9 महीने पहले
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  • विनम्र शिक्षण शिविर में हुई परीक्षा के विजेताओं काे बांटे पुरस्कार, विनम्र सागर महाराज ने बच्चों को दिया आशीर्वाद

गत दिवस विनम्र शिक्षण शिविर में मोरल साइंस फर्स्ट व द्वितीय, णमोकार, भक्तांबर कक्षा, तत्वार्थ सूत्र की महिमा में महिला वर्ग पुरुष वर्ग में बालकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। आचार्य विनम्र सागर ससंघ सानिध्य में यह परीक्षा संपन्न हुई, जिसमें प्रथम द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी के साथ साथ सभी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

जिन्होंने धर्म की शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी सीखे और प्रज्ञा, बुद्धि, मेधा, प्रतिभा का परिचय दिया। इस माैके पर आचार्य विनम्र सागर महाराज ने कहा कि ज्ञान ही नए जीवन का सार है, सार को प्राप्त करने के लिए विनम्रता, समर्पण का होना आवश्यक है क्योंकि बिना इनके विद्या की प्राप्ति होती नहीं होती है। विनय के कारण ही छात्र-छात्राएं मेधावी प्रतिभा शाली बनकर मेरिट में स्थान पाते हैं। पवन जैन मेडिकल वालों की ओर से सभी लोगों को पुरस्कार वितरित किए गए और लोगों का उत्साह वर्धन किया गया।

इस अवसर पर आचार्य भगवन विनम्र सागर गुरुदेव ने सभी विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि ऐसे ही धर्म, संस्कृति, ज्ञान, विनय, भक्ति के संस्कारों के माध्यम से आगे बढ़ते रहिएगा। एक ना एक दिन आप अवश्य ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। गुरुदेव ने कहा कि शिक्षा से ही महान बनते हैं यही महानता ही सम्मान दिलाती है शिक्षा का ज्ञान होने के कारण सभी लोग हमारा नाम स्मरण करते हैं इसलिए ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में प्रात उठकर जल्दी पढ़ने का प्रयास करना चाहिए उससे आपके ब्रेन के जितने भी सेल्स होते हैं वह चार्ज होने लगते हैं और व्यक्ति देखते देखते दिन दोगुना रात चौगुना तरक्की करने लगता है।

व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करके अपने आगे के दिनचर्या के कार्यों की ओर ध्यान देना चाहिए। प्रभु की भक्ति ज्ञान का टॉपिक है और विनय थर्मामीटर है,यह दोनों संस्कार ही व्यक्ति को महान बनाते हैं।

गुरुदेव ने अंत में कहा कि अपने मन को नियंत्रित करना सीखिए क्योंकि अभी इस समय पर आपका मन आपको नियंत्रित करता है आप अपने मन को नियंत्रित नहीं कर पाते जिस दिन आपके मन को आप नियंत्रित करने लग जाएंगे उस दिन से आपकी किस्मत अपने आप ही बदलने लगेगी मन को नियंत्रित करने से व्यक्ति की सोचने को क्षमता नियंत्रित होती है और सोचने की क्षमता के नियंत्रण से वाणी नियंत्रित हो जाती है और व्यक्ति की वाणी नियंत्रित होते ही आदत, चरित्र और भाग्य अपने आप नियंत्रित हो जाते है। फिर आप जैसा चाहते हैं वैसा बनते हैं।

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