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कोरोना महामारी:तीसरी लहर का रिस्क कवर, पहली तिमाही में 32% ज्यादा ने ली बीमा पॉलिसी

धौलपुरएक महीने पहले
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  • धौलपुर में 9वें दिन भी कोई नया पॉजिटिव नहीं, अब सिर्फ एक एक्टिव केस, 2 रोगी ठीक होकर घर लौटे

काेराेना की तीसरी लहर को लेकर लोगों में खासी चिंता है। इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल अप्रैल-मई-जून की पहली तिमाही में ही भरतपुर जोन के बीमा कारोबार 32.29% की ग्रोथ आई है।

लगभग यही हाल जयपुर डिवीजन की सभी 18 ब्रांच का है। इनमें ओवर ऑल 23 हजार 500 पॉलिसी बिकी हैं। जो पिछले साल से 16.32 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान अधिक रिस्क कवर करने वाली जीवन अमर टर्म पॉलिसी ज्यादा बिकी हैं। इसकी वजह यह है कि टर्म इंश्योरेंस में 25 लाख के रिस्क कवर वाली 40 साल की पॉलिसी पर करीब 13246 रुपए प्रीमियम आ रहा है। जबकि अन्य पॉलिसी लेने पर 73 हजार 757 रुपए प्रीमियम देना होता है।

इसलिए पॉलिसी की संख्या बढ़ने के बाद भी प्रीमियम राशि 7.77% माइनस में है। पिछले साल जयपुर डिवीजन में 3231 लाख रुपए का प्रीमियम मिला था। इस साल 3297 पॉलिसी अधिक बिकने के बावजूद प्रीमियम 2980 लाख रुपए ही मिला है। उल्लेखनीय है कि कोरोना की पहली लहर में जनहानि कम हुई थी। लेकिन, दूसरी लहर में डेल्टा वेरिएंट की वजह से बड़ी संख्या में लोगों को जान गंवानी पड़ी है।

इस वजह से तीसरी लहर को लेकर लोग काफी आशंकित हैं। संभवतः इसीलिए युवा वर्ग टर्म पॉलिसी और बुजुर्ग जीवन बीमा पॉलिसी ज्यादा ले रहे हैं। इधऱ, बुधवार को धौलपुर जिले में 9वे दिन एक भी पॉजिटिव नहीं मिला। जबकि 2 रोगियों के ठीक होने के बाद एक्टिव केस की संख्या घटकर एक ही रह गई है।

यूं समझिए कैसे बढ़ रहा बीमा कंपनियों का कारोबार

एक्सपर्ट व्यूः लोग कोरोना की वजह से ले रहे पॉलिसी

चीफ लाइफ इंश्योरेंस एडवाइजर ओ.पी. माहेश्वरी बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में अनिश्चिता का जो माहौैल बना उससे लोग काफी चिंतित हैं। यही वजह है कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए लोग बीमा को ही बेहतर समझ रहे हैं। टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम कम और रिस्क कवर अधिक है। इसलिए युवा इस पॉलिसी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। क्योंकि कोरोना से मौत बीमा पॉलिसी में शामिल है।

गाैर करें- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रिकॉर्ड में कोरोना से 260 मौतें, मृत्यु प्रमाण पत्र 3448 जारी हुए

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में कोरोना से 260 मौतें हुई हैं। जबकि पिछले तीन महीने में ही 3448 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए हैं। इनमें ज्यादातर मौत का कारण कोरोना माना गया है। इस दौरान मौसमी बीमारी अथवा एक्सीडेंट से मौतें बहुत कम हुई हैं। सरकारी आंकड़ों में अंतर का बड़ा कारण अस्पतालों द्वारा रिकॉर्ड में वही मौतें कोरोना से मानी गई हैं जिनकी आरटी पीसीआर जांच हो चुकी थी। उल्लेखनीय है कोरोनाकाल में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुईं थी।

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