कोरोना इफेक्ट / लाॅकडाउन से कछुओं की तस्करी रुकी, नमामि गंगे प्रोजेक्ट से चंबल में होगा संरक्षण

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दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 07:25 AM IST

धौलपुर. दुनिया भर में फैले कोरोना वायरस ने भले ही हर किसी को बुरी तरह से प्रभावित किया हो, लेकिन जलीय जीवाें की दुनिया में शामिल दुलर्भ कछुओं को इस बदले हुए हालात मे संजीवनी मिली है। देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान के संरक्षण अधिकारी डाॅ. राजीव चौहान बताते है कि असल मे कोरोना वायरस के प्रभाव के बाद हुए लाॅकडाउन ने हर प्रकार की गतिविधियो पर रोक लगा दी है । इन्ही रूकी हुई गतिविधियो का फायदा तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में पसरी राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी और अन्य नदियों तालाबों, झीलों में पाए जाने वाले दुर्लभ कछुओं को बडी तादात में मिला है। चंबल में बाटागुर कछुआ, निलसोनिया गंगेटिका, निलसोनिया ह्यूरम, जियोक्लमस हेमिल्टनाई, पंगशुरा टेक्टा, लिसीमस पंक्टाटा, चित्रा इंडिका नामक कछुओ को अनुसूची प्रथम एवं पंचम में शामिल करके रखा गया है। चौहान कहते हैं बताया कि दुनिया भर में फैले कोरोना संक्रमण के कारण हुए लाॅक डाउन मे कछुओ को दो प्रकार से फायदा पहुंचा है। जहां एक और इनका अवैध शिकार रुका है वहीं दूसरी ओर इनके प्राकृतिक वास स्थलों को प्रजनन के लिए संरक्षण प्राप्त हुआ है । नदियों के आस पास बालू के किनारों एवं दीपों पर कछुए फरवरी से मार्च के बीच बालू में गड्ढा खोदकर अंडे देते हैं । जो लाॅक डाउन के दौरान बालू के किनारों एवं दीपों पर मानव गतिविधियों के चलते इनके अंडों को नुकसान पहुंचता था। वह इस बार नहीं हो सका है। जिससे काफी सारे घोंसले बच गए। जो निश्चित रूप से इनकी जनसंख्या में इजाफा करेंगे। वही लाॅक डाउन के कारण सारे वाहन बंद होने से जो अवैध रूप से कछुओं का शिकार कर पश्चिम बंगाल की ओर ले जाया जाता था। वह भी पूर्ण रूप से बंद रहा भारतीय कछुओं की खोल, मांस या फिर उसके बने चिप्स की मांग पूरी दुनिया में है। कुछ देशों में कछुए का मांस बहुत पसंद किया जाता है। कछुए के सूप और चिप्स को भी तरह से तरह से बनाकार परोसा जाता है, लेकिन अबलॉक डाउन के बाद अब बिल्कुल तस्वीर बदली हुई दिख रही है।

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