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समीक्षा:छात्र जर्मन, फ्रेंच भाषा भी स्वेच्छा से सीख सकेंगे, एमफिल हटने से स्नातकोत्तर के बाद पीएचडी करना आसान होगा

धौलपुर7 दिन पहले
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  • नई शिक्षा नीति 2020 पर जिले के शिक्षाविदों ने की चर्चा, बोले- इससे छात्रों को मिलेगी विश्व स्तर की शिक्षा
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जागृति समिति द्वारा राजरानी शिक्षा निकेतन उमावि में शिक्षाविदों छात्रों तथा अभिभावकों के मध्य नई शिक्षा नीति 2020 की समीक्षा की। इस अवसर पर सम्मानित शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष दयाकांत सक्सेना ने कहा कि 1986 में शिक्षा नीति बनाई गई थी उसमें 6 वर्ष बाद 1992 में आंशिक परिवर्तन किए गए तथा 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति 2020 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

इसमें पहले 10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 का ढांचा बनाया गया है। प्रथम चरण की पढ़ाई 5 वर्ष की होगी। जिसमें 3 वर्ष नर्सरी की पढ़ाई, उसके बाद 2 वर्ष कक्षा 1 और कक्षा 2 की पढ़ाई होगी। इसमें खेल-खेल में शिक्षा तथा स्थानीय क्षेत्रीय मातृभाषा में शिक्षा दी जाएगी। यह पढ़ाई कक्षा दो तक चलेगी। दूसरे चरण में कक्षा 3, 4 तथा 5 की पढ़ाई होगी। इसमें है भविष्य की तैयारी के साथ विज्ञान गणित कला तथा सामाजिक विज्ञान पर जोर दिया जाएगा। तीसरे चरण में मिडिल स्तर की पढ़ाई में कक्षा 6 से 8 तक छात्रों को कंप्यूटर कोडिंग तथा व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी। इसमें छात्र इलेक्ट्रिशियन छोटे-मोटे उद्योग धंधे लाउंड्री, मोबाइल बनाना सीखेंगे तथा 10 दिन की इंटर्नशिप भी करनी पड़ेगी।

चौथे चरण में कक्षा 9 से 12वीं तक की शिक्षा में छात्र अपनी मर्जी से विषय चुन सकेंगे विज्ञान का छात्र जीव विज्ञान के साथ-साथ इतिहास भी पड़ सकता है। स्ट्रीम के अनुसार बाध्यता समाप्त कर दी गई है तथा कक्षा 10वीं में बोर्ड समाप्त कर दिया है तथा परीक्षा सेमेस्टर के आधार पर होगी। इसमें कक्षा 12वीं में बाेर्ड रखा गया है। कक्षा बारहवीं के बाद कॉमन एंट्रेस एग्जाम ही बोर्ड रखा गया है इसमें छात्र स्नातक परीक्षा में भाग ले सकेंगे तथा 1 वर्ष की स्नातक करने पर सर्टिफिकेट 2 वर्ष के बाद डिप्लोमा तथा 3 वर्ष करने पर डिग्री और चौथी वर्ष रिचार्ज के साथ डिग्री मिल सकेगी। इसमें छात्र बीच में छोड़कर जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर आ सकेगा।

पूर्व शिक्षा उपनिदेशक गणेश कुमार ढाकरे ने कहा कि नई शिक्षा नीति में इंटर के बाद 4 वर्ष का बीएड स्नातक के बाद 2 वर्ष तथा एमए के बाद 1 वर्ष का बीएड होगा। सेवा नि.प्राचार्य अलका सक्सेना ने कहा है कि प्रथम 5 वर्षों में बालक को फाउंडेशन स्टेज में मजबूत नीव प्रदान करना खेल खेल में शिक्षा शारीरिक और मानसिक विकास तथा छात्र की अपनी मातृभाषा में शिक्षा मिलेगी। राजरानी शिक्षा निकेतन की निदेशक डॉ ऋचा श्रीवास्तव ने की छात्र भारतीय भाषाओं के साथ जर्मन, फ्रेंच विदेशी भाषा भी स्वेच्छा से सीख सकेंगे तथा एमफिल हटाने से स्नातकोत्तर के बाद पीएचडी करना आसान होगा। इसमें ज्ञान विज्ञान तथा अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर अभिभावकों तथा छात्रों के विचार भी मिलेंगे तथा सभी ने कक्षा 10वीं में बोर्ड परीक्षा समाप्त करने पर हर्ष व्यक्त किया। प्राचार्य भारत सिंह ने बताया कि शिक्षा के अधिकार के तहत अब कक्षा 12वीं तक निशुल्क शिक्षा आरटीई के तहत मिल सकेगी। व्याख्याता नीरज गोस्वामी ने बताया कि रिसर्च फाउंडेशन बनने से देश में युवा वैज्ञानिक बनेंगे एवं छात्र त्रिभाषा फार्मूला के अनुसार शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। समिति के अध्यक्ष सुरेश श्रीवास्तव, दर्शन सिंह परमार, सचिव महेंद्र कांत सक्सेना, शिक्षाविद वीरी सिंह, भारत, नीरज गोस्वामी, सद्दाम, योगेश कांत सक्सेना, राजीव सक्सेना, शिवदत्त शर्मा, राजेश उदेनिया उपस्थित रहे।

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