अब तबाही के निशां ही बाकी...:बाढ़ का पानी उतरा, मंजर देखते ही घर लौटे लोगों के होश उड़े, कमरों-आंगन में एक-एक फुट मिट्टी, दीवारों में दरारें

धौलपुर/राजाखेड़ा6 महीने पहले
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धौलपुर. गांव हेत सिंह का पुरा में घर में भरे पानी को निकालते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
धौलपुर. गांव हेत सिंह का पुरा में घर में भरे पानी को निकालते ग्रामीण।
  • राजाखेड़ा और धौलपुर तहसील के बाढ़ प्रभावित आधा दर्जन गांवों में पहुंची भास्कर टीम

चंबल उतार पर आने के साथ ही अब बाढ़ प्रभावित गांवों में भी पानी निकल गया है। अब तक बीहड़ोंं और ऊंचे स्थानों पर कैंपों में रह रहे ग्रामीण भी घरों को लौटने लगे हैं। लेकिन, जिन गांवों में बाढ़ का पानी निकल गया है, वहां अब सिर्फ तबाही के निशां ही बाकी हैं। घरों के अंदर का मंजर देखकर घर वालों के होश उड़े हुए हैं।

महिलाओं और बच्चे आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। दैनिक भास्कर संवाददाता ने शुक्रवार को धौलपुर और राजाखेड़ा क्षेत्रों के गढ़ी जाफर, अंधियारी, हेतसिंह का पुरा धौलपुर के बरैलापुरा समेत करीब आधा दर्जन गांवों का जायजा लिया। इस दौरान देखा कि कोई आंगन में जमी एक-एक फुट मिट्टी को देख रहा है तो कोई बाढ़ में खत्म हुए चूल्हा-चाकी के कचरे को फेंक रहा है।

कोई गिरी हुई झोपड़ी उठाता नजर आया तो कोई कमरों की साफ-सफाई में जुटा रहा। दरअसल, चंबल और पार्वती नदी में आई बाढ़ ने 100-125 गांवों को तबाह कर दिया है। पिछले 25 साल में यह दूसरा मौका था जब चंबल नदी का गेज 144.70 मीटर तक पहुंचा। इससे पहले वर्ष 1996 में 145.54 मीटर तक जा चुका है।

शुक्रवार रात 8 बजे नदी का गेज 140.00 मीटर बना हुआ था। इसके सुबह तक बढ़ने की आशंका है। चंबल की बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर प्रशासन ने सर्वे शुरू करवा दिया है। कलेक्टर ने बताया कि गिरदावरी की टीमों को लगवाकर बर्बाद हुई फसलों का सर्वे तैयार करवाया जा रहा है।

राशन सड़ गया, बिस्तर और कपड़ों समेत सामान खराब

धौलपुर जिले की राजाखेड़ा तहसील के गांव दगरा और हेतसिंह का पुरा में बाढ़ की वजह से घरों में रखा राशन, अनाज, दालें, अचार, बिस्तर और कपड़े सब कुछ नष्ट हो चुका है। स्थानीय ग्रामीण सूबा, खिलाई, महाराज सिंह ने बताया कि काफी सामान तो बाढ़ के पानी में ही बह गया है। वह मिल ही नहीं रहा है। आलमारियों में पानी भरने से जरूरी कागजात और अन्य कीमती सामान भी खराब हो गए हैं। इस स्थिति से उबरने में उन्हें करीब एक साल लग जाएगा।

राशन सड़ गया, बिस्तर और कपड़ों समेत सामान खराब

धौलपुर जिले की राजाखेड़ा तहसील के गांव दगरा और हेतसिंह का पुरा में बाढ़ की वजह से घरों में रखा राशन, अनाज, दालें, अचार, बिस्तर और कपड़े सब कुछ नष्ट हो चुका है। स्थानीय ग्रामीण सूबा, खिलाई, महाराज सिंह ने बताया कि काफी सामान तो बाढ़ के पानी में ही बह गया है। वह मिल ही नहीं रहा है। आलमारियों में पानी भरने से जरूरी कागजात और अन्य कीमती सामान भी खराब हो गए हैं। इस स्थिति से उबरने में उन्हें करीब एक साल लग जाएगा।

सड़कें टूटी, ट्यूबवेल चॉक, बिजली के पोल धराशायी

गढ़ी जाफर और हेत सिंह का पुरा समेत अधिकतर गांवों की सड़कें टूट चुकी हैं। बाढ़ की वजह से ट्यूबवैल, सबमर्सिबल चॉक हो गए हैं। गांव और खेतों में लगे तमाम बिजली के पोल धराशायी हो गए हैं। इन गावों में रहने वाले जयवीर, श्रीभगवान, किशन जाटव, छुटई ने बताया कि शाम होते ही अंधेरा हो जाता है। बिजली आ नहीं रही।

हर समय सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जानवरों का खतरा लगा रहता है। पूरी रात बेचैनी में निकलती है। इधर, बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह से पानी निकलने के बाद ही इन गांवों में बिजली व्यवस्था बहाल हो पाएगी। इसमें 10 से 15 दिन लग सकते हैं।

फोन से बात तक नहीं कर पा रहे

गांव गढ़ी जाफर में लगा प्राइवेट कंपनी का टावर भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। इससे लोगों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है। दगरा और आसपास के गावों में बिजली नहीं होने से लोग ट्रैक्टरों की बैटरी से मोबाइल को चार्ज करके काम चला रहे हैं।

सिंचाई विभाग के अधिशांषी अभियंता एचएल मीणा ने बताया कि झालावाड़ और बारां जिले में अधिक बारिश होने से कालीसिंह और परवन दोनों बांध लबालब हैं। ऐसे में झालावाड़ के काली सिंध बांध के 14 गेटों को खोलकर 1 लाख 60 हजार क्यूसेक और बारां के परवन बांध से दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी की निकासी की गई है, जो कल तक चंबल नदी में पहुंचना शुरू होगा।

गांव हेत सिंह का पुरा में मकान के अंदर घुसे कीचड़ को बाहर निकालता ग्रामीण।
गांव हेत सिंह का पुरा में मकान के अंदर घुसे कीचड़ को बाहर निकालता ग्रामीण।

ऐसी तबाही कभी नहीं देखी, कलेजा फट रहा है: जनक

राजाखेड़ा के गढ़ी जाफर, अंधियारी, हेतसिंह का पुरा में महिलाओं बुजुर्गों और बच्चों के चेहरे उतरे हुए हैं। बाढ़ से हुए नुकसान को देखकर हर शख्स की आंख में आंसू हैं। क्योंकि बाढ़ का पानी उतरने के 5 दिन बाद वे घरों में लौटे हैं। अंधियारी के जनक सिंह निसाद बताते हैं कि ऐसी तबाही तो उन्होंने कभी नहीं देखी। इसे देखकर कलेजा फट रहा है। तिनका-तिनका जोड़कर गृहस्थी बसाई थी। अब पूरी तरह से बिखर गई है। घर-आंगन में कीचड़ से भरे हैं। सफाई करने में ही कई दिन लग जाएंगे।