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स्मृति शेष:दिलीप कुमार पर थे चैक बाउंस के कई केस, कोर्ट कभी नहीं आने दिया

धौलपुर25 दिन पहले
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बतौर एक्जीक्यूटिव चेयरमैन उन मुकदमों में दिलीप कुमार साहब को भी पक्षकार बनाया जाता था। - Dainik Bhaskar
बतौर एक्जीक्यूटिव चेयरमैन उन मुकदमों में दिलीप कुमार साहब को भी पक्षकार बनाया जाता था।
  • याददाश्त इतनी कम हा़े गई थी कि पिछले 6-7 साल से ट्रेजडी किंग पत्नी सायरा बानो को भी नहीं पहचान पाते थे

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार आज अलविदा हा़े गए। धौलपुर में तो उनका आना-जाना नहीं हुआ। लेकिन, उनका धौलपुर से गहरा रिश्ता जुड़ गया था। क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी के 20 साल उनकी कंपनी में बतौर जनरल मैनेजर और लीगल एडवाइजर गुजारे थे। साल 1988 की बात है मैंने भाजपा युवा मोर्चा के मंत्री के पद के साथ धौलपुर छोड़ा था।

मुंबई जाकर वकालत शुरू की। उसी दौरान मैंने जीके एक्जिम इंडिया लिमिटेड कंपनी ज्वाइन की थी। दिलीप कुमार साहब इस कंपनी के नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन थे। जब उनसे पहली मुलाकात हुई। तब उनकी उम्र 72 साल थी। उर्दू, अंग्रेजी और हरियाणवी को वे रियल जिंदगी में भी बोलते थे।वक्त-वक्त की बात है। उनकी कंपनी पर दिल्ली, अहमदाबाद, बेंगलुरू और चेन्नई समेत लगभग हर बड़े शहर में चेक बाउंस के केस हो गए। इनकी संख्या करीब 115 तक पहुंच गई।

बतौर एक्जीक्यूटिव चेयरमैन उन मुकदमों में दिलीप कुमार साहब को भी पक्षकार बनाया जाता था। मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मैंने उन्हें कभी किसी कोर्ट में हाजिर नहीं होने दिया। लगभग सभी केस उनके जीते जी सेटल्ड कराए। इसलिए आज जो दाल रोटी खा रहा हूं, वह उन्हीं की बदौलत है। सभ्यता और संस्कृति उनमें कूट कूटकर भरी थी। एक बार मैं जब किसी केस में उनसे डिस्कस करने गया था। बात करके लौटा तो एक दो कागजात रह गए थे।

उन्होंने खुद आकर गाडी का गेट खोला और अपने सहयोगी से कागज मंगवाकर दिए। मुझे गाडी से नहीं उतरने दिया, तब तक वे गेट पकड़कर ही खड़े रहे। गडरपुरा निवासी इकबाल समेत उनकी कंपनी में बहुत लोग थे। जो धौलपुर से थे। वे उन सभी से प्रभावित थे और परिवार की तरह मिलते थे।

उम्र के साथ दिलीप कुमार की याददाश्त कम होने लगी थी

धौलपुर से एमएलए बनने के बाद जब मैं दिलीप कुमार साहब से मिलने मुंबई गया तो पता चला कि वे अपनी बेगम सायरा बानो को भूल से गए थे। मुझे भी बस देखते ही रहे। चेहरा देखकर लगता था कि वे पहचानने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी ऐसी स्थिति 6-7 साल से थी। वे साहित्यिक उर्दू बोलते थे। साल 2008 में उनकी ऑटो बायोग्राफी लांच हुई। राजस्थान के शिक्षा मंत्री दुर्रू मियां से भी उनके अच्छे संबंध थे।

अब्दुल सगीर पूर्व विधायक एवं करीब 20 साल तक दिलीप साहब के वकील रहे।