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जीवन शैली:जीवन में पुस्तक से ज्यादा गुरू का महत्व, विद्या वास्तविकता में अर्जित करने के लिए गुरू की शरण में ही जाना पड़ता है: विनम्र सागर महाराज

धौलपुर2 महीने पहले
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उच्चारणाचार्य विनम्र सागर गुरुदेव ने अपनी मधुर वाणी में संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन अर्थ ग्रहण करने के लिए होता है। विद्यार्थियों को वास्तविकता में कुछ नहीं करना पड़ता, ना लाना पड़ता है, ना बनाना पड़ता है, ना ही कमाना पड़ता है। मात्र पढ़ना पड़ता है क्योंकि कमाने के लिए, लाने के लिए, बनाने के लिए, सब कुछ करने के लिए आपके माता-पिता होते हैं उसके लिए उन्हें अधिक मेहनत नहीं करना पड़ता।

विनम्र सागर महाराज गुरुद्वारा माेड स्थित राॅयल पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में गुरुदेव ने कहा कि स्वयं भोजन उनके माता-पिता करें या ना करें स्वयं अच्छे कपड़े। उनके माता-पिता पहने या ना पहने, लेकिन हर माता-पिता की चाहत होती है कि अपने बच्चे को अच्छा भोजन अच्छे से अच्छे पहनावा, अच्छे संस्कार सब कुछ अच्छे से अच्छा देने का प्रयास हमेशा हर एक मां-बाप करते हैं।

बच्चे को अच्छे से अच्छा बनाने के लिए योग्य व्यक्ति बनाने के लिए माता-पिता पूरी जिंदगी अपनी दाव पर लगा देते हैं और बच्चे को योग बनाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। वह हमेशा चाहते हैं कि हमारा बच्चा मेरिट में आए और जब बच्चा मेरिट में आता है तो बच्चों से माता-पिता का सम्मान होता है तब माता-पिता से बच्चे की पहचान नहीं होती।

एक बच्चे से माता-पिता की पहचान होती है और इससे गौरवशाली पल एक माता पिता के लिए और कुछ नहीं हो सकता। गुरुदेव ने आगे कहा कि किताबों से विद्या की अधिक प्राप्ति नहीं होती। गुरु से विद्या की प्राप्ति होती है किताब हर एक व्यक्ति एक पुस्तकालय या फिर किसी किताब की दुकान से ला सकता है लेकिन विद्या वास्तविकता में अर्जित करने के लिए उसको हर हाल में स्कूल, कॉलेज में जाना ही पड़ता है।

किसी गुरु का सहारा लेना ही पड़ता है इसलिए किताबों का महत्व नहीं है तो गुरु का है किताब मूल्यवान नहीं है गुरु मूल्यवान है गुरु के द्वारा दी गई विद्या हमेशा कीमती होती है। ज्ञान निजी संपत्ति है, जो गुरु इस ज्ञान को प्रकट करते हैं। विनय के द्वारा विद्या की प्राप्ति होती है, परमात्मा का आशीर्वाद व गुरुओं की कृपा से विद्या की प्राप्ति होती है प्रातः जल्दी उठकर विद्या को प्राप्त करना चाहिए पूज्य गुरुदेव ने अपनी मधुर वाणी में कहा कि प्रात उठकर जो व्यक्ति विद्या को प्राप्त करने के लिए प्रयास करते हैं अवश्य एक दिन वह सफलता की ऊंचाइयों को छूते हैं जहां पहुंचने के लिए और दूसरे लोग केवल और केवल सपना देखते हैं जो व्यक्ति सुबह प्रातः काल की बेला में सुबह 4 से उठकर पढ़ते हैं अवश्य ही उसकी स्मरण शक्ति अधिक बढ़ जाती है और उनको और लोगों की अपेक्षा अधिक जल्दी याद हो जाता है।

गुरु के चरण स्पर्श करने से गुरुओं की भक्ति करने से विद्या, प्रज्ञा, मेधा प्रतिभा, ज्ञान अधिक निकलता है। विद्या आंखों से हाथ की गद्दी से पैरों के स्पर्श करने से गुणों की ऊर्जा प्राप्त होती है इसलिए पुस्तक से ज्यादा गुरु की कीमत करो गुरु की कीमत को समझो गुरुओं का आदर करो सम्मान करो तो 1 दिन तुम्हारा भी सम्मान अवश्य ही होगा।

गुरुदेव ने कहा कि व्यक्ति को मेहनत करते रहना चाहिए पुरुषार्थ करते रहना चाहिए जब वह एक विद्यार्थी के रूप में उपस्थित होता है तो माता-पिता को इस दौरान विद्यार्थी पर पल पल पर नजर रखते रहना चाहिए जिससे उसका उनका बच्चा अधिक से अधिक अच्छे गुणों को धारण करके अपने जीवन में उतार कर आगे अपने आने वाले भविष्य में अधिक ऊंचाइयों को प्राप्त करें। इस अवसर पर जैन समाज के प्रवक्ता धनेश जैन, प्रदीप जैन, विनय जैन, सौरभ जैन सहित समाज की बालिकाएं, महिलाएं बच्चे माैजूद रहे।

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