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दम तोड़ रहा कोरोना:पिछले 6 दिन में 1875 सैंपलों की जांच, कोई नया रोगी नहीं, अब एक्टिव केस भी सिर्फ एक

भरतपुर3 दिन पहले
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भरतपुर. तीसरी लहर का खतरा फिर भी सोशल डिस्टेंस नहीं रख रहे लोग। - Dainik Bhaskar
भरतपुर. तीसरी लहर का खतरा फिर भी सोशल डिस्टेंस नहीं रख रहे लोग।
  • कोरोना प्रोटोकॉल भूल रहे हैं ताे जुगल बिहारी और राजेश की कहानी पढ़ें, जिन्हें अस्पताल में गुजारने पड़े 11 से 17 दिन

भरतपुर के लिए सुखद खबर है। हमारी सतर्कता और हौंसले से अब कोरोना भी दम तोड़ रहा है। पिछले 6 दिन में 1875 सैंपलों की जांच हुई है। इस दौरान एक भी नया पॉजिटिव रोगी नहीं मिला है। पुराने रोगी भी लगभग सभी ठीक हो चुके हैं। सिर्फ एक ही एक्टिव केस रह गया है। कोरोना से मौतों का सिलसिला तो 4 जुलाई को ही थम गया था।

शुक्र है, पिछले 17 दिन में किसी की भी जान नहीं गई है। बस और रेल चालू होने के साथ ही लगभग सभी व्यवसाय खुल चुके हैं। जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। लेकिन, अभी सावधानी बहुत जरूरी है। जैसी की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है, इसे रोकने के लिए मास्क और वैक्सीन जरूर लगाएं।

चिकित्सकों की मानें तो कोरोना संक्रमण को रोकने में वैक्सीनेशन से काफी मदद मिली है। क्योंकि जिन लोगों को वैक्सीन की पहली डोज भी लग चुकी है, उनमें एंटी बॉडी बनने लगी है। इसलिए जैसे-जैसे वैक्सीनेशन बढ़ रहा है, उससे हार्ड इम्युनिटी डवलप हो रही है। संभवतः इसीलिए अब नए रोगी मिलने की स्पीड बिलकुल थम सी गई है।

जिले में बुधवार तक करीब 3.54 लाख सैंपलों की जांच हो चुकी है। इनमें 19588 सैंपल पॉजिटिव आए थे। जबकि 19327 लोग पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि एक केस अभी भी सक्रिय है। इस दौरान 260 लोग जान गंवा चुके हैं। कोरोना संक्रमण की दो लहरों को झेलने के बाद भी यदि हम सतर्क नहीं हुए तो तीसरी लहर का सामना करना पड़ सकता है। जिससे लॉकडाउन लगने की पूरी संभावना हो जाएगी।

अस्पताल से छुट्‌टी के बाद भी दोनों की तबीयत ठीक नहीं

राजेश कुमारी : ठीक होने के ढाई माह बाद भी कोमा जैसी कंडीशन हो गई, अब कोई काम भी नहीं हाेता है

गोपालगढ़ मोहल्ले में कठपुतली मंदिर के पीछे रहने वाली राजेश कुमारी पूनियां बताती हैं कि वे 30 अप्रैल से 12 मई तक आरबीएम अस्पताल में भर्ती रही थीं। ठीक होने के बाद उन्हें फिर 19 से 22 मई तक पोस्ट कोविड वार्ड में भर्ती रहना पड़ा। क्योंकि पूरा शरीर सुन्न हो गया था और कोमा जैसी कंडीशन में पहुंच गई थी।

पहले तो मैं बहुत काम कर लेती थी। अब नहीं कर पाती हूं। भीड़ को देखकर गुस्सा आता है। ढाई माह बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हूं इसलिए दवाएं ले रही हूं। इसलिए आप कोरोना को हलके में बिलकुल न लें। प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करें और वैक्सीन लगवाएं।

जुगल बिहारी : ठीक होने के बाद भी सांस फूलती है, 6-7 किलो वजन कम हुआ, कमजाेरी भी रहती है

कुम्हेर गेट पर पिक्चर पैलेस के पीछे रहने वाले सहायक लेखाधिकारी जुगल बिहारी सक्सैना के मुताबिक वे कोरोना पॉजिटिव होने के कारण 4 से 15 मई और उनकी मां आशा सक्सेना 13 से 24 मई यानि 11-11 दिन अस्पताल में भर्ती रहे। मेरा ऑक्सीजन लेवल 82 और मां का 72 था। इसलिए हम दोनों ही ऑक्सीजन पर रहे। लेकिन, ठीक होने के बाद भी मेरी सांस फूलती है। एक बार तो स्वाद भी चला गया था। एक माह तक परेशान रहा। करीब 6-7 किलो वजन कम हो गया। काफी कष्ट झेला है। इसलिए आप घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और वैक्सीन जरूर लगवाएं।

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