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जनाना अस्पताल में नहीं सुधरी व्यवस्थाएं:एचआईवी जांच के 38 में से 19 सैंपल फिर रिजेक्ट, गर्भवती महिलाएं हो रहीं परेशान

भरतपुरएक महीने पहले
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जिला नोडल अधिकारी (एचआईवी एड्स) डा. अविरल कुमार सिंह ने एचआईवी जांच लैब के तकनीकी सहायक राजेंद्र प्रसाद पाठक को जांच कार्य में कमियों के संबंध में नोटिस दिया है। - Dainik Bhaskar
जिला नोडल अधिकारी (एचआईवी एड्स) डा. अविरल कुमार सिंह ने एचआईवी जांच लैब के तकनीकी सहायक राजेंद्र प्रसाद पाठक को जांच कार्य में कमियों के संबंध में नोटिस दिया है।
  • अभी भी अनट्रेंड कर्मी ले रहा सैंपल

जनाना अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। एचआईवी की जांच के 38 सैंपलों में से 19 सैंपल जयपुर में रिजेक्ट हो गए। जिला नोडल अधिकारी (एचआईवी एड्स) डा. अविरल कुमार सिंह ने एचआईवी जांच लैब के तकनीकी सहायक राजेंद्र प्रसाद पाठक को जांच कार्य में कमियों के संबंध में नोटिस दिया है।

वहीं स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के अतिरिक्त निदेशक डा. जी.एल. मीणा ने अप्रशिक्षित कार्मिक को हटाने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी भास्कर ने 22 अप्रैल के अंक में ‘लापरवाही की हाद...जनाना में गर्भवती महिलाओं के एचआईवी टेस्ट बंद, तीन दिन से खुले में पड़े सैंपल भी हो रहे हैं खराब’ शीर्षक से जनाना अस्पताल की एचआईवी जांच लैब में अनियमितताओं के संंबंध में खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद जांच कार्य फिर से शुरू हुआ, लेकिन तकनीकी सहायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से अनियमितता व गड़बड़ी जारी हैं।दरअसल, एचआईवी एड्स पीड़ितों की बीएनपी प्लस संस्थान के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह ने इस मामले को लेकर शिकायत की थी जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ।

एक ही किट से की जांच, इसलिए रिजेक्ट हो जाते हैं सैंपल

जिला नोडल अधिकारी (एचआईवी एड्स) डाॅ. सिंह ने जो स्पष्टीकरण मांगा है उसमें लिखा है कि एचआईवी सेंटिनल सर्विलांस के 38 सैंपल जयपुर भेजे गए थे, जिसमें 19 सैंपल रिजेक्ट कर दिए गए। केन्द्र की जा रही जांचों में कई बार ऐसा हुआ है कि व्यक्ति को आपके यहां नॉन रिएक्टिव आया है, परंतु अन्य स्थान पर जांच कराने पर रिएक्टिव आता है।

ऐसा ही 16 अप्रैल को एक गर्भवती महिला की रिपोर्ट में हुआ है, जिसकी रिपोर्ट नॉन रिएक्टिव दी गई जबकि आरबीएम अस्पताल में जांच कराने पर उक्त महिला रिएक्टिव पाई गई, जो अत्यंत गंभीर लापरवाही है। एआरटी सेंटर को जाने वाली रिपोर्ट भी गलत भिजवाई जा रही है। जिससे मरीजों के इलाज में बिलंव होता है।

एचआईवी पीड़ित मां के बच्चे के 18 माह में होने वाले 4 टैस्ट 3 किटों से किए जाने होते हैं, जबकि यहां लैब में यह कार्य एक किट से ही किया जा रहा है एवं 42 दिन में होने वाले बच्चों के डीबीएस सैंपल जो एम्स दिल्ली जाते हैं वह भी आपके द्वारा भेजा गया वह भी रिजेक्ट हो गया। एचआईवी किट का सही प्रकार से संधारण नहीं किया जा रहा है।

सिम्स मासिक रिपोर्ट भी आपके द्वारा चाहे गए सही रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने के कारण नहीं जा पा रही है। आप लैब में उपलब्ध नहीं रहते हैं, अन्यत्र स्थान पर बैठकर कार्य संपादित करते हैं, जिससे आपका कार्य सुचारू नहीं होने के साथ-साथ अन्य के कार्य प्रभावित होते हैं। इन सभी बिंदुओं का तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।

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