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ऐसे कैसे हारेगा कोरोना:26 नए पॉजिटिव मिले, इनमें सर्वाधिक 18 भरतपुर शहर के, कुल आंकड़ा अब 1930

भरतपुरएक महीने पहले
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  • मोबाइल पर सिर्फ सैंपल की सूचना नेगेटिव रोगियों को नहीं मिलती रिपोर्ट

भरतपुर जिले में शुक्रवार को 26 और नए पॉजिटिव रोगी मिले हैं। इनमें सर्वाधिक 18 भरतपुर शहर के हैं। इन्हें मिलाकर अब तक कुल 1930 संक्रमित रोगी सामने आ चुके हैं। इनमें से 1642 लोग ठीक होकर घर लौट गए हैं। नए रोगियों में कृष्णा नगर -1,  अटल बंध -1, अनाह गेट- 1, रुंधिया नगर -1, खेरापति मोहल्ला- 2, राजेंद्र नगर -1, सूरजमल नगर -1, मुखर्जी नगर -1, जवाहर नगर- 2, कोतवाली थाना- 2, सुभाष नगर -3, श्याम नगर -1 और 1 अन्य हैं।

दूसरी ओर अपने कोरोना सैंपल की जांच नतीजा जानने के लिए अनेक लोग सीएचसी और अस्पतालों में चक्कर लगा रहे हैं। कुछ लोग तो जांच नतीजा समय पर नहीं मिलने के कारण अपनी दूसरी बीमारियों का समय पर इलाज भी शुरू नहीं करवा पा रहे हैं। क्योंकि अभी व्यवस्था यह है कि अगर किसी की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो संबंधित रोगी के पास चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का फोन चला जाता है। क्योंकि उस संक्रमित रोगी को अस्पताल में भर्ती करना होता है।

इसी दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम संक्रमित रोगी के परिजनों और कांट्रेक्ट हिस्ट्री वाले लोगों को तलाश करके उनकी स्क्रीनिंग करने की कार्रवाई करती है। लेकिन, बड़ी परेशानी उन लोगों की है जिन्हें सैंपल देने के बाद लंबे टाइम तक जांच नतीजा ही नहीं पता चलता। क्योंकि उन्हें फोन करने अथवा एसएमएस से जांच नतीजा बताने की व्यवस्था ही नहीं है। बल्कि अगर किसी रोगी को अपनी जांच रिपोर्ट पता करनी है तो उसे संबंधित सीएचसी अथवा अस्पताल में जाना ही होगा।

कैंसर के इलाज के लिए जयपुर भी नहीं जा सके

गिर्राज कालोनी के गिर्राज प्रसाद शर्मा कैंसर पीड़ित है। उन्हें इलाज के लिए जयपुर जाना था। उन्होंने आरबीएम में 3 जुलाई को कोरोना सैंपल दिया था। मोबाइल पर मैसेज भी आया। लेकिन, उसमें टेस्ट रिजल्ट का कॉलम खाली है। अस्पताल से रिपोर्ट पता नहीं लग सकी। गुरुवार को जयपुर नहीं जा सका। पीएमओ से शिकायत करने पर रिपोर्ट मिली जो नेगेटिव थी। 

नेगेटिव हुए, एक माह बाद भी रिपोर्ट नहीं हुई अपडेट

स्वर्ण जयंती के मनोज की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। फोलोअप जांच के लिए भी दो बार सैंपल जमा कराए थे। मोबाइल फोन पर आए मैसेज में टेस्ट रिजल्ट का कॉलम अभी तक खाली ही आ रहा है। जबकि मैं पिछले महीने ही पॉजिटिव से नेगेटिव हो गया था। अपने स्तर पर रिपोर्ट का पता लगा। लेकिन, मोबाइल मैसेज में कॉलम अपडेट आजतक नहीं होना बड़ी परेशानी है।

असर... जांच नतीजा मिलने तक रहता है संक्रमण फैलने का खतरा

सैंपल देने के बाद संबंधित व्यक्ति को लंबे समय तक जांच नतीजा पता नहीं चलने से शहर में संक्रमण और फैलने का खतरा बना रहता है। क्योंकि तब तक संबंधित व्यक्ति घर-परिवार और अन्य लोगों से मिलता है। जब तक जांच रिपोर्ट पता चलती है, तब तक वह कई लोगों को संक्रमित कर चुका होता है। उदाहरण के तौर पर कुम्हेर गेट सब्जी मंडी 24 मई की रात्रि करीब 51 लोगों के सैंपल लिए थे। इनकी रिपोर्ट 29 मई को आई। जिसमें 27 लोग संक्रमित थे। तब तक ये सभी लोग आपस में खूब घुले-मिले।

यह हो सकता है समाधान

अभी सैंपल देते वक्त संबंधित व्यक्ति को आईसीएमआर स्पेसीमैन रेफरल फॉर्म फॉर कोविड-19 में मैसेज मोबाइल पर मिलता है। इसमें उसका आईडी नंबर और व्यक्तिगत जानकारी होती है। इसमें सबसे नीचे लैब टेस्ट रिपोर्ट का कॉलम भी है। अगर, जांच रिपोर्ट आने के बाद इस कॉलम को ऑनलाइन अपडेट कर दिया जाए तो संबंधित व्यक्ति को उसके नेगेटिव या पॉजिटिव होने की रिपोर्ट मोबाइल पर ही मिल जाएगी।

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