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चिकित्सा राज्यमंत्री डॉक्टर सुभाष गर्ग के प्रयास रंग लाए:शहर के मास्टर ड्रेनेज प्लान पर 200 के बजाय 275 करोड़ खर्च होंगे, जलभराव से मिलेगी निजात

भरतपुरएक महीने पहले
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  • सीएम ने दी वित्तीय एवं प्रशासनिक मंजूरी, नगर निगम 150 करोड़ रुपए का लोन लेगा, बाकी पैसा सरकार देगी

शहर को करीब 3 दशक बाद जलभराव से जल्द निजात मिलेगी। क्योंकि 275.66 करोड़ रुपए के मास्टर ड्रेनेज प्लान को राज्य सरकार से वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। हालांकि इसके लिए पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में 200 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा था।

स्थानीय विधायक एवं चिकित्सा राज्यमंत्री डॉक्टर सुभाष गर्ग शहर की सबसे बड़ी इस समस्या के समाधान के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। इसके तहत पहले उन्होंने नगर निगम से प्रस्ताव पारित करवाया। डीपीआर बनवाने के साथ ही राज्य सरकार से बजट प्रावधान कराया। बाद में पता चला कि इस मास्टर ड्रेनेज प्लान पर 200 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि खर्च होगी। इस पर उन्‍होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात करके इसकी राशि को भी बढ़वाया है।

उल्लेखनीय है कि भरतपुर में पहले पुराने शहर के हिसाब से सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन (सीएफसीडी) और गिर्राज कैनाल बनी हुई हैं। लेकिन, बाद में सरकूलर रोड के बाहर अनेक नई कॉलोनियां बसने के साथ ही शहर का काफी फैलाव हो गया है। सीएफसीडी में जगह-जगह अतिक्रमण होने के कारण बरसाती पानी की ठीक से निकासी नहीं हो पाती है।

इससे सरकुलर रोड के बाहर की 50 से अधिक कॉलोनियों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। बरसात के दिनों में तो इन कॉलोनियों में कई-कई दिन तक पानी भरा रहता है। लोगों को मकान खाली करके पुरानी सिटी के मकानों में शिफ्ट होना पड़ता है। इसी वजह से अधिकांश मकानों में सीलन और फंगस की भी समस्या बनी रहती है। शहर का पूरा इंटीग्रेटेड प्लान मंजूर करने के लिए चिकित्सा राज्यमंत्री डॉक्टर सुभाष गर्ग ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार जताया है।

पूरे शहर का इंटीग्रेटेड ड्रेनेज प्लान होगा: गोयल

शहर से बरसाती और गंदे पानी की निकासी के लिए अब इंटीग्रेटेड मास्टर ड्रेनेज प्लान बनाया गया है। इसमें सेवर से लेकर रेलवे स्टेशन के आसपास और कुम्हेर रोड से लेकर आगरा रोड तक के पूरे शहर के पानी की निकासी की व्यवस्था होगी। इसमें घरों, मोहल्लों को नालियों से, कॉलोनियों को बड़े नालों से और बड़े नालों को गहरे नाले से जोड़ा जाएगा। पानी के बहाव के हिसाब से लेवल ठीक करते हुए पूरा पानी बाहर एक ही जगह पर निकाला जाएगा। इसके बाद लोगों को मच्छरों की समस्या से भी निजात मिलेगी।
- डॉ. राजेश गोयल, आयुक्त नगर निगम

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