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जिले में ओलावृष्टि से 17833 हैक्टेयर फसल खराब:33 हजार किसानाें काे अगले 10 दिन में मिलेगा 23 कराेड़ रुपए का मुआवजा, तब भी किसानाें काे लागत से चार कराेड़ रुपए का घाटा

भरतपुर3 दिन पहले
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पिछले दिनाें हुई ओलावृष्टि से जिले के 60 गांवाें में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान माना गया है। सर्वे के अनुसार 17 हजार 833 हैक्टेयर फसल खराब हुई है, जिससे 33 हजार 242 किसान प्रभावित हुए हैं। इसमें छाेटे किसानाें की संख्या 31 हजार 595 है। इन किसानाें की फसल काे 33 प्रतिशत से अधिक खराबा माना गया है। प्रभावित किसानाें काे 23 कराेड़ 59 लाख रुपए मुआवजा मिलेगा। प्रशासन ने सरकार काे सेवन डी की रिपाेर्ट भेज दी है। समझा जाता है कि अगले 10 दिन में मुआवजे की राशि किसानाें के खाताें में आ जाएगी। इसमें छाेटे किसानाें काे 19.15 कराेड़ और अन्य काे 4.44 कराेड़ रुपए मुआवजा मिलेगा। लेकिन इसके बाद भी किसान घाटे में रहेंगे, क्याेंकि लागत मूल्य से ही करीब 4 कराेड़ रुपए का नुकसान है।

भाजपा किसान माेर्चा के प्रदेश प्रवक्ता नैमसिंह फाैजदार कहते हैं कि आपदा राहत कोष से सहायता की गाइडलाइन है उसमें हुड्‌डा कमेटी की सिफारिशों में एक हेक्टेयर पर 25 हजार का मुआवजा देने की बात कही गई है। लेकिन राज्य सरकार अभी भी 13750 रुपए हैक्टेयर मुआवजा दे रही है। जबकि डीएपी, जाेत,मेज, बीज, यूरिया से प्रति हैक्टेयर लागत करीब 16 हजार रुपए से अधिक आती है। इसी प्रकार भाकियू के राष्ट्रीय सचिव राजपालसिंह पूनिया का कहना है कि मुआवजे के मैथड बदलना चाहिए, जिससे किसानाें काे उसकी लागत ताे मिल सके।

एडीएम प्रशासन बीना महावर ने बताया कि 60 गांवाें के 17833 हैक्टेयर में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान है। मुआवजा राशि के लिए 7-डी की रिपाेर्ट सरकार काे भेज रहे हैं। अगले 8-10 दिन में मुआवजा राशि किसानाें तक पहुंच जाएगी।

फायदा भी होगा... 120 करोड़ के पानी की बचत
ओलावृष्टि/ मावठ से सिर्फ नुकसान ही नहीं है, बल्कि गेहूं, चना, सरसों फसल को फायदा भी हुआ है। संयुक्त निदेशक कृषि देशराजसिंह ने बताया कि मावठ से फसल में अच्छी ग्रोथ आती है। पाले से बचाव और रासायनिक खाद की कम जरुरत पड़ती है। मावठ से प्रति हैक्टेयर करीब 4 हजार रुपए की बचत हुई है। जिले में करीब 3.10 लाख हैक्टेयर में बुआई है। करीब 15 फीसदी उत्पादन अधिक हाेगा।

राहत...सर्वाधिक डीग के 34 गांवाें काे मिलेगा मुआवजा
ओलावृष्टि से करीब 66 गांव प्रभावित हुए थे, जिसमें 60 गांवाें में 33 प्रतिशत से अधिक खराबा हाेने के कारण मुआवजा दिने की कार्रवाई की जा रही है। इसमें सबसे अधिक 34 गांव डीग के हैं। इसके अलावा नदबई के 19, कुम्हेर, नगर, वैर के दाे-दाे तथा भुसावर का एक गांव शामिल हैं। कुम्हेर के गांव मुरवारा व थैरावर, नदबई के गांव तलछेरा, खुर्रमपुर, गाजीपुर, चिडररऊआ, मनाेहरपुर, कटारा, ईशापुर, नगला कुरवारिया, करीली, ऊंच, लालपुर, छतरपुर, नगला गाेपाल, भदीरा, घेरा, ऐंचेरा, ऊसेरा व बराैलीरान, डीग के गांव अचलपुर, किशनपुर, आबादी डीग, मालपुर, नरायन कटता, बहताना, श्याेरावली, सहारई, आखाैली, गुलैना, नगला मई, श्योरावली कालाेनी, खाेहरी, जनूथर, गाराैली, नगला जनूथर, श्योपुरा, शाहपुर, रामबाग, पहाड़ताल, नहाराैली देशवार, नहाराैली ठाकुर, नसवाड़ा, गाैराेली, गिरसे, घना गिरसे, नगला लखमी, मालपुर, श्रीपुर, भदीरा व बंधाचाैथ, वैर के गांव मुखैना और भूतोली, भुसावर के गांव बिजवारी, नगर के गांव थून और पालतू काे शामिल किया गया है।

क्लेम अंतिम तिथि आज, 7 हजार किसान बकाया
क्लेम की अंतिम तारीख 15 जनवरी है। अभी तक 59 हजार 427 बीमा धारक किसानाें में से करीब 52 हजार 200 ने ही आवेदन किया है। ओलावृष्टि प्रभावित किसान फसल बीमा क्लेम के लिए टोल फ्री नंबर 1800-1024-088 पर शिकायत दर्ज कराएं। कृषि पर्यवेक्षक के माध्यम से बीमा कंपनी को लिखित आवेदन भी करें। बीमा कंपनी भी नुकसान का अपने स्तर पर सर्वे करा रही है।

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