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हौसले के दम पर जीत ली कोरोना से जंग:मुकेश के परिवार के 4 सदस्य कोरोना से संक्रमित हुए, एक का निधन, भाई और दाेस्ताें के भरेासे कोरोना को हरा दिया...

भारतपुर20 दिन पहले
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मुकेश सिंघल, काेराेना वरियर्स - Dainik Bhaskar
मुकेश सिंघल, काेराेना वरियर्स
  • फेसबुक के बजाए जीवंत दाेस्ताें के साथ रहाे, हर जंग जीत जाओगे
  • गंभीर संक्रमण था, रोजाना लोगों के मरने की खबरेें मन को विचलित कर रही थीं, लेकिन हिम्मत रखी

पिछले दिनाें मेरे लिए बेहद कष्टकारी थे। परिवार के 6 में 4 सदस्य पाॅजिटिव हा़े गए, जिसमें ससुर किशोर अग्रवाल 62 वर्ष की काेराेना से निधन हाे गया। उस समय भी परिवार के शेष तीन सदस्य पाॅजिटिव थे। दुसह: दुख, निराशा और चिंता पूरे घर में व्याप्त थी। काेराेना का पीक टाइम था।

बावजूद मेरे भाईयों और मित्रों ने साथ नहीं छाेड़ा। मोटिवेट किया। इस पर मैंने, पत्नी रंजना और बेटे विपिन ने घर में ही आईसालेशन रहने और इलाज कराना तय किया। यद्यपि में तबीयत बिगड़ने पर मैं दाे दिन 27-28 अप्रैल काे अस्पताल में भर्ती भी रहा, लेकिन 4 मई काे ससुर किशोर अग्रवाल की माैत हा़े जाने पर मैं खुद ही डिस्चार्ज हाेकर आ गया। संक्रमण की शुरुआत 18 अप्रैल काे रंजना काे बुखार आने से हुई। दाे दिन मौसमी बीमारी समझ घर पर दवाएं दी।

थाेड़ी लापरवाही से मुझे, ससुर किशोर और बेटे विपिन में लक्षण दिखे। हम तुरंत आइसोलेट हा़े गए और टेस्ट कराया। 24 अप्रैल काे चाराें पाॅजिटिव थे। हमने एलॉपैथी के साथ आयुर्वेद और नेचुरोपैथी का सहारा लिया। लगातार प्राेनिंग की, जिससे ऑक्सीजन लेवल काे 90 से नीचे नहीं जाने दिया। सीटी वैल्यू 13 थी। हमने भाप और अनुलाेम-विलाेम से फेफड़ों के इंफेक्शन काे नियंत्रित किया। अब हम सभी नेगेटिव हैं। 24 अप्रैल से 6 मई के इस सफर में मेरा अनुभव है कि काेराेना संक्रमण काे गंभीरता से ताे लाे, लेकिन घबराएं नहीं। फेसबुकिया के बजाए जीवंत लाेगाें से दाेस्ती रखाे। मुसीबत में साथ खड़े रहेंगे ताे दुआ भी दवा बनकर काम करती है। मेरा आग्रह है कि मुसीबत के दाैर में दूसरों का सहारा बनें। हर जंग जीत जाएंगे।

मुकेश सिंघल, काेराेना वरियर्स

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