भास्कर खास:भरतपुर में रोज आ रहा 6000 किलो आम, भाव 60 रुपए किलो तक

भरतपुर6 महीने पहले
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मौसम में आई तल्खी के साथ ही आम में भी मिठास बढ़ गई है। इसलिए आम की डिमांड बढ़ी है। इसलिए भरतपुर में अब रोजाना 6000 किलो से ज्यादा आम आ रहा है। इसकी खपत में करीब 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। कारोबारी अंसार खान कहते हैं कि गर्मी जैसे-जैसे बढेग़ी आम में मिठास और बढ़ती चली जाएगी। फिलहाल हैदराबाद का बादाम/सफेदा आ रहा है। यह हैवी पीस होता है और शुरुआती दिनों में इसमें खटास होती है। इसलिए मिडिल क्लास इसे खरीदने से बचता है।

इसकी आवक मार्च के शुरूआती दिनों में ही हा़े जाती है। लेकिन, अब तापमान 42-43 डिग्री को क्रॉस कर रहा है। इससे इसकी आवक, भाव और स्वाद कंट्रोल में है। इसलिए डिमांड भी बढ़ गई है। इसका सर्वाधिक उपयोग आमरस में होता है। अगले पखवाड़े से आम की सबसे लोकप्रिय और सहज उपलब्ध किस्म दशहरी की आवक भी शुरू हा़े जाएगी। इसके बाद लंगडा, चाैसा, सरोली भी आएगा। उस समय इसकी आवक पांच गुना तक बढ़ जाएगी। यानी करीब 20 हजार किलो आम प्रतिदिन आने लगेगा।

इसकी वजह आगरा, मथुरा, कासगंज, अलीगढ़, एटा, इटावा की फसल भरतपुर में आसानी से आती है। फिलहाल मार्केट में उपलब्ध बादाम/सफेदा आम थोक में 20 रुपए से 45 रुपए किलो है। खेरुज में अभी करीब 50-60 रुपए किलो बिक रहा है। दशहरी आने पर आम 40 से 50 रुपए किलो तक रहने की संभावना है।

भास्कर नॉलेज... आम की 1500 से ज्यादा किस्में, देश में 1000
एक स्टडी के मुताबिक दुनिया में आम की 1500 से ज्यादा किस्में हैं। इनमें से करीब 1000 किस्में तो भारत में ही पैदा होती हैं। इनमें अल्फांसाे, केसर, फजली, डिंगा, चाैसा, दशहरी, लंगडा, बादाम, नीलम, सिंदूरी, राजापुरी प्रसिद्ध किस्में हैं। मुगलकाल में भुसावर और वैर आम उत्पादक क्षेत्र था। यहां पैदा होने वाला आम आगरा, दिल्ली और बयाना शाही घरानों में विशेष रूप से मंगवाया जाता था। शाहजहां पेशगी देकर भुसावर के आम मंगाता था। यहां अभी भी सालों पुराने आम के पेड़ हैं।

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