बच्चे भी वायरल की चपेट में:अस्पताल में रोज आ रहे करीब 150 रोगी ठीक होने में लग रहे 5 से 7 दिन, पैरासिटामोल टेबलेट भी बेअसर

भरतपुर2 महीने पहले
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राजकीय जनाना अस्पताल में एक-एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती। - Dainik Bhaskar
राजकीय जनाना अस्पताल में एक-एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती।
  • जनाना अस्पताल के सभी वार्ड फुल, एक बेड पर 2 से 3 बच्चों का करना पड़ रहा है इलाज, संक्रमण का खतरा

जिले में इन दिनों खांसी, जुकाम, उल्टी-दस्त, डेंगू और वायरल बुखार जैसी मौसमी बीमारियों का प्रकोप है। बड़े तो बड़े बच्चे भी जबरदस्त तरीके से इनकी चपेट में हैं। भरतपुर के राजकीय जनाना अस्पताल की ओपीडी इन दिनों 260 से बढ़कर 375 तक पहुंच गई है। अस्पताल के सभी वार्ड फुल हो चुके हैं। बेड कम पड़ रहे हैं। हालात ये हैं कि शिशु वार्ड की क्षमता 28 बेड की है। लेकिन, 50 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं।

एनआईसीयू में भी 24 की जगह 30 और पीआईसीयू में 6 की जगह 8 बच्चे भर्ती हैं। गंभीर रोगियों के लिए भी बेड उपलब्ध नहीं हैं। एक बेड पर 2 से 3 बच्चों का इलाज करना पड़ रहा है। इससे संक्रमण का फैलने का खतरा बना हुआ है, सो अलग। शिशु रोग विभाग के एचओडी डा. हिमांशु गोयल का कहना है कि इन दिनों मौसमी बीमारियों का सीजन है जो दीपावली तक रहेगा। इसलिए ओपीडी में रोजाना 200 से 250 बच्चे आ रहे हैं।

इनमें 150 बच्चे वायरल बुखार के होते हैं। अगर बीते 10 दिन की बात करें तो अगस्त के मुकाबले इस महीने भर्ती रोगियों की संख्या ज्यादा है। पिछले महीने जहां औसत 28 बच्चे भर्ती हो रहे थे, वहीं सितंबर में ये आंकड़ा बढ़कर 46 तक पहुंच गया है। यह बुखार भी इस बार कुछ अलग ही है। क्योंकि पहले जहां बच्चे 2 या 3 दिन में ठीक हो जाते थे। अब 5 से 7 दिन का समय लग रहा है। बुखार भी काफी तेज आ रहा है।

इस पर पैरासीटामोल टेबलेट से भी ठीक से काम नहीं कर रही है। इधर, अस्पताल के वार्डों में हाल ये है कि बेड पर भर्ती एक बच्चे के साथ कई परिजन होने से वार्ड में काफी भीड़भाड़ है। न तो सोशल डिस्टेंस रह पा रही है और न ही लोग मास्क लगाकर आ रहे हैं। उन्हें रोकने और टोकने वाले गार्ड तक नहीं हैं। सहायक कर्मचारियों की कमी है। इसलिए संक्रमण का खतरा बना हुआ है, जो बच्चों की सेहत के लिए ठीक नहीं है।

सावधानी बरतें...दीपावली तक बना रह सकता है मौसमी बीमारियों का प्रकोप

एक्सपर्ट व्यू... एक बेड पर 2-3 बच्चे रखने से संक्रमण का खतरा रहता है
सितंबर और अक्टूबर में वायरल, निमोनिया, मलेरिया, डेंगू का सीजन रहता है। एक बेड पर 2 या 3 बच्चों को भर्ती रखने से संक्रमण की आशंका बनी रहती है। अगर अस्पताल में कोई वार्ड खाली हो तो वहां अतिरिक्त बेड लगाने के प्रयास करने चाहिए। -डा. राजकुमार गुप्ता, सीनियर प्रोफेसर, जेके लोन हॉस्पिटल जयपुर

शिशु वार्ड फुल हैं, लेकिन अतिरिक्त वार्ड के लिए न स्थान है और न स्टाफ: डा. रूपेंद्र
हां, ये सही है कि शिशु वार्ड फुल है। अतिरिक्त बेड लगाने के लिए हमारे पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। क्योंकि, स्थान और स्टाफ की कमी है। जल्दी ही नए पीआईसीयू और एनआईसीयू वार्ड शुरू हो जाएंगे। मौसमी बीमारियां भी कम हो जाएंगी। फिर दिक्कत नहीं रहेगी।-डा. रूपेंद्र झा, प्रभारी जनाना अस्पताल

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