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धौलपुर में कार्रवाई:एसीबी ने फाॅरेस्ट गार्ड को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा

भरतपुरएक महीने पहले
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  • वन विभाग ने लगाया था 51 हजार रुपए का जुर्माना, पूछताछ शुरू

अवैध रेता में पकड़ी गई ट्रैक्टर-ट्राॅली को छोड़ने के एवज में 20 हजार की रिश्वत लेते फोरेस्ट गार्ड अजय सिंह पुत्र हरिभान निवासी उमरारा को भरतपुर एसीबी एएसपी महेश मीणा ने मंगलवार को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी फाॅरेस्ट गार्ड अजय सिंह ने परिवादी वीरेंद्र सिंह पुत्र धर्म सिंह निवासी झार पुरा थाना कौलारी से रिश्वत की मांग की थी।

मामले का भौतिक सत्यापन कराकर एसीबी के एडिशनल एसपी महेश मीणा ने  अाराेपी फारेस्ट गार्ड अजय को दबोच लिया है। आरोपी को हिरासत में लेकर एसीबी की टीम ने पूछताछ शुरू कर दी है। एसीबी के एएसपी महेश मीणा ने बताया कि परिवादी 25 वर्षीय वीरेंद्र सिंह पुत्र धर्म सिंह की ट्रैक्टर-ट्राली अवैध बजरी का परिवहन करते हुए अक्टूबर 2019 में दिहौली थाना पुलिस ने पकड़ी थी। दिहौली थाना पुलिस ने मुकदमा फाॅरेस्ट एक्ट में दर्ज कर कार्रवाई के लिए कार्यालय वन रक्षक धौलपुर को सुपुर्द किया था।

गार्ड कई माह से पीड़ित को कर रहा था परेशान

वन विभाग ने आरोपी पर 51 हजार की जुर्माना राशि लगाई थी। जिस राशि को परिवादी ने 4 जुलाई 2020 को डीडी के माध्यम से वन विभाग में जमा कराया था, लेकिन डीएफओ कार्यालय का फाॅरेस्ट गार्ड आरोपी अजय सिंह परिवादी वीरेंद्र सिंह से ट्रैक्टर-ट्राॅली छोड़ने के एवज में 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग कर रहा था। आरोपी फाॅरेस्ट गार्ड पिछले कई माह से पीड़ित को परेशान कर रिश्वत राशि के लिए दबाव बना रहा था। परिवादी ने प्रकरण की शिकायत एसीबी कार्यालय पर दर्ज कराई थी।

मामले का एसीबी टीम ने जाल बिछाकर भौतिक सत्यापन कराया। मंगलवार को आरोपी फाॅरेस्ट गार्ड अजय ने परिवाद को रिश्वत की राशि लाने के लिए जाखी गांव बुलाया था। पीड़ित ने आरोपी को जैसे ही रिश्वत की राशि सुपुर्द की। तभी एसीबी की टीम ने गार्ड को रंगे हाथों दबोच लिया। एसीबी की टीम ने आरोपी के कब्जे से रिश्वत की राशि बरामद कर ली। मीणा ने बताया घूसखोर फाॅरेस्ट गार्ड को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।

एसीबी जांच में कई मामले और आ सकते हैं सामने

जिले में चंबल बजरी दोहन को लेकर पुलिस द्वारा दर्जनों ट्रैक्टरों को जब्त किया गया है, जिसमें पुलिस ने अधिकांश ट्रैक्टरों को सुपुर्द कर दिया है। ऐसे में वन विभाग द्वारा ही उन्हें रिलीज किया जाता है। जिसमें विभाग द्वारा ही उन पर जुर्माना वसूल कर उन्हें छोड़ा जाता है। बड़ा सवाल यह है कि विभाग में इस तरह से भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों की मानें तो एसीबी की जांच में कई और मामले सामने आ सकते हैं। इधर, पिछले वर्ष वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों द्वारा एक-दूसरे पर अवैध बजरी निकासी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए थे। जिसमें वन कर्मियों ने डीएफओ को हटाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी किया था। जिसके बाद एपीओ होने के बाद डीएफओ स्टे लेकर वापस आ गए। वहीं धरना-प्रदर्शन करने वाले कर्मी एपीओ कर दिए गए थे।

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