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लोहा बाजार में बर्तनों की दुकान खाली कराने का मामला:आधी सदी बाद तीसरी पीढ़ी को मिला न्याय; 66 साल लड़ा मुकदमा, अब असली मालिक को मिला दुकान का कब्जा

भरतपुरएक महीने पहले
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भरतपुर. कोर्ट के आदेश पर दुकान खाली कराकर निकाला गया सामान। - Dainik Bhaskar
भरतपुर. कोर्ट के आदेश पर दुकान खाली कराकर निकाला गया सामान।

किराए की दुकान का कब्जा लेने के लिए दो पक्षकारों ने आधी सदी से भी ज्यादा यानि 66 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। तब जाकर तीसरी पीढ़ी को न्याय मिल पाया। राजस्थान किराया अधिकरण के आदेश पर बुधवार दोपहर लोहा बाजार की एक दुकान के ताले कटवाने पड़े। जबरन सामान निकलवाकर किराएदार को सामान संभलवाया। तब जाकर असली मालिकों को दुकान का कब्जा मिल सका।

इससे पहले कोर्ट के सेल अमीन वीरेंद्र गुप्ता और एसआई विशंभर पुलिस जाब्ते के साथ दोपहर में जब लोहा बाजार स्थित मुकेश स्टील पर दुकान का कब्जा दिलाने पहुंचे तो बर्तनों की यह दुकान बंद थी। कोर्ट कर्मचारियों ने किराएदार और दुकान संचालक मुकेश कुमार को फोन करके मौके पर बुलाया। काफी इंतजार के बाद भी जब किराएदार नहीं पहुंचा तो कटर से ताले कटवाए गए।

भीतर रखे माल को निकलवाना शुरू किया ही था कि तभी वहां दुकानदार की पत्नी और बेटी पहुंच गईं। उन्होंने फिलहाल दुकान खाली नहीं करने को कहा। आधी से ज्यादा दुकान खाली होने के बाद किराएदार मुकेश कुमार भी वहां आ गया। इस पर उन्हें सारा सामान सुपुर्द करके दुकान का कब्जा असली मालिक नवीन बंसल को दिलवाया।

कोर्ट अमीन को दुकान के ताले कटवाकर बाहर निकालना पड़ा सामान

तीन पीढ़ियों से लड़ रहे थे दुकान का मुकदमा

इस दुकान को लेकर दोनों पक्ष तीन पीढ़ियों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। अधिवक्ता अनिल गुप्ता के अनुसार इस संपत्ति के लिए सबसे पहले वर्ष 1955 में सांवलिया राम ने किराएदार घीसाराम के खिलाफ मुकदमा किया था। बाद में उनके वारिस गिर्राज शरण ने किराएदार के खिलाफ 1968 से 2011 तक मुकदमे लड़े। फिर उनके बेटे नवीन बंसल ने नए किराएदारी कानून के तहत 2014 में नया केस दायर किया। हाईकोर्ट तक नवीन के पक्ष में आदेश आने पर अधिकरण ने अप्रेल, 2021 में कब्जा वारंट जारी किया था।

इस तरह चले कानूनी दांव-पेंच

1955 - सांवलिया राम ने किराएदार घीसाराम के खिलाफ केस किया। 1968 - वारिस गिर्राज शरण ने घीसाराम के वारिस बाबूलाल पर केस किया। 1975 - गिर्राज शरण ने कब्जा लेने के लिए 2011 तक मुकदमा लड़ा। 2014 - वारिस नवीन बंसल ने बाबूलाल के बेटे मुकेश कुमार पर केस किया। 2017- किराया अधिकरण ने मालिक नवीन के पक्ष में फैसला सुनाया। 2018 - अपीलीय अधिकरण ने भी नवीन के पक्ष में फैसला सुनाया। 2018 - मालिक नवीन ने कब्जा लेने की इजराय पेश की। 2021 - हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने भी मार्च में मालिक के पक्ष में फैसला किया। डिवीजन बैंच ने अप्रेल में किराएदार की अपील खारिज कर दी।