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लचर स्वास्थ्य व्यवस्था:4 घंटे के इंतजार के बाद मरीज प्राइवेट हॉस्पिटल जाने को हुआ मजबूर, न स्टेचर मिली, न इलाज

भरतपुर6 दिन पहले
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आरबीएम अस्पताल में स्टॉफ कंट्रोल के बाहर है। एक मरीज को अस्पताल में न स्टेचर मिली, न मरीज को टांके लगाए और न उपचार शुरू किया और मरीज दर्द से कराहता रहा। सिटी स्कैन रिपोर्ट भी सुबह से शाम तक चक्कर लगाने पर भी नहीं मिली। हुआ ये कि कस्बा कामां के गोपीनाथ मोहल्ला निवासी शांति देवी पत्नी रामस्वरूप सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थी, जो कामां से रेफर होकर आरबीएम अस्पताल पहुंची।

पीड़ित परिवार के परिजन देवेंद्र भट्टाचार्य ने बताया कि वहां 15 से 20 मिनट तक तो उसे स्ट्रेचर नहीं मिली, जबकि मरीज के आने से पहले ही कामा विधायक जाहीदा खान का पीएमओ व जिला कलेक्टर के पास भी फोन पहुंच गया था। काफी देर बाद जब स्ट्रेचर मिली तो टॉली पुलर उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए और आपस में ही बहस करने लग गए।

वह स्वयं अपने घायल मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर अस्पताल में पहुंचे, तभी एक पत्रकार के हस्तक्षेप के बाद बीच रास्ते से स्ट्रेचर को ट्रोमा तक ले जाया गया। वहाँ मरीज की पट्टी खोलकर देखी और फिर बांध दी। उन्हें टांके लगाकर उपचार के लिए कहा तो नहीं सुना। जब उन्हें पता चला कि पीएमओ को शिकायत की गई है तो उन्होंने टांके लगाने से मना कर दिया और कहा कि पीएमओ मैडम से ही टांके लगवा लो।

25 मिनट तो मरीज को बिना इलाज के रखा गया और फिर चौथी मंजिल पर वार्ड में भर्ती कर दिया। वहाँ एक डॉक्टर ने देखकर सीटी स्कैन लिख दिया और सिटी स्कैन 1100 रुपए फीस जमा कराने के बाद भी नही दी। वार्ड में भी मरीज को न इंजेक्शन लगाया और न ही टांके लगाए।

चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ सुभाष गर्ग से भी शिकायत की गई और पीएमओ डॉ जिज्ञासा साहनी के चेंबर में जाकर कहा गया, लेकिन वार्ड में इलाज शुरू तक नहीं किया गया। आखिर 4 घंटे तक इंतजार के बाद दोपहर करीब 2 बजे मरीज को प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पीएमओ डॉ. जिज्ञासा साहनी ने बताया कि कि मरीज को सुबह 9 से 11 बजे की ओपीडी समय में डॉ आरडी शर्मा ने देख कर ही इलाज लिख दिया था और उन्होंने सिटी स्कैन जांच लिखी थी।

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