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बाज़ार अनलॉक लेकिन ग्राहक गायब:सभी तरह के व्यापार सिमटे 50 प्रतिशत के अंदर, लॉकडाउन की मार से 70 प्रतिशत व्यापारी कर्ज में डूबे

भरतपुरएक महीने पहले
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बाजार में खरीदारी कम हो रही है। - Dainik Bhaskar
बाजार में खरीदारी कम हो रही है।

भरतपुर के बाज़ार भले ही अनलॉक हो गए हों लेकिन व्यापारी अभी भी परेशान हैं क्योंकि बाज़ार से ग्राहक पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। व्यापारी दिनभर ग्राहकों की बाट जोहता रहता है। पूरे दिन दो तीन ग्राहक अगर व्यापारी के पास पहुंच जाएं तो बहुत समझो।

पहले के मुक़ाबले आज का व्यापार सिर्फ गिरकर सिर्फ 30 प्रतिशत ही रह गया है। इसके अलावा व्यापारी लॉकडाउन की वजह से काफी कर्ज में भी डूब चूका है। जब व्यापारियों से बात की तो उन्होंने बताया की भरतपुर में 70 प्रतिशत व्यापारी कर्ज में डूब चुका है। हर तरह के व्यापारी की आय 40 प्रतिशत के अंदर आ गई है और दुकान के खर्चे, घर के खर्चे सहित अन्य खर्चे लगाकर उन्हें प्रतिदिन का खर्च निकालना अब मुश्किल होता जा रहा है।

फसल की कटाई को देखते और शादियों के सीजन को देखते हुए व्यापारियों ने दुकानों में स्टॉक तो भर लिया लेकिन अब वह स्टॉक ऐसे ही रखा हुआ है। उसे खरीदने वाला ग्राहक बाज़ार से गायब हो चूका है। अब कर्ज़दार व्यापारी के सर पर पैसे के लिए मंडरा रहे हैं। हालांकि बाज़ारों में भीड़ तो काफी है लेकिन व्यापारी के पास ग्राहक नहीं हैं।

भरतपुर का व्यापारी व्यापार के लिए फसल के ऊपर ही निर्भर रहता है क्योंकि फसल अच्छी होगी तो बाज़ार में ग्राहक खरीदारी करने उतरेगा क्योंकि खेती के अलावा भरतपुर के लोगों के पास और कोई रोजगार का साधन नहीं है। यहां न तो कोई फैक्ट्री है और न ही कोई बड़ी इंडरस्ट्रीज जिससे लोगों को रोजगार मिले और बाज़ार में पैसा उतरे।

व्यापारियों का कहना है कि सामान्य वर्ग का व्यापारी लॉकडाउन की वजह से ख़त्म हो चुका है और जिन व्यापारियों की खाद्य सामग्री की फैक्ट्री थी वह लॉकडाउन के समय में मुनाफा कमा गए। इस मुश्किल दौर में कई तो ऐसे भी व्यापारी हैं जिन्होंने अपना व्यापार तक बदल लिया।

किस-किस व्यापार में कितनी आई गिरावट

  • कपड़े की दुकानों में 70 प्रतिशत तक गिरावट
  • मिठाई की दुकानों में 60 प्रतिशत तक गिरावट
  • राशन की दुकानों में 60 प्रतिशत तक गिरावट
  • खाद्य सामग्री की दुकानों में 60 प्रतिशत तक गिरावट
  • जूते-चप्पल की दुकानों में 65 प्रतिशत तक गिरावट
  • खेती से जुड़ी दुकानों में 50 प्रतिशत तक गिरावट
  • इलेक्ट्रॉनिक की दुकानों में 60 प्रतिशत तक गिरावट
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